एक नजर

Friday, 11 December 2020

crime against women


   एक महिला का बलात्कार नही बल्कि न्याय का बलात्कार है 
     हाथरस की घटना  || Rape In  India 


बात बीते कुछ दिन पूर्व कि है जब उत्तर प्रदेश के  हाथरस में  चार ( संदीप , रवि ,रामू , लवकुश )  दरिन्दे के द्वारा एक उन्नीस साल की लड़की के साथ बलात्कार की दरिन्दगीय वारदात को अंजाम दिया जाता है जो पिछले किन्ही भी घटनाओ से भी बढ़कर  मानवीयता को शर्मसार करती है |

भारत की ५० % आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला नोची जाती है , कांट के फेक दी जाती है , रौंदी जाती है | इसके बावजूद हम बड़े फक्र से कहते है कि हमारी सभ्यता श्रेष्ट में भी श्रेष्ट है | 



      इमेज स्त्रोत  - सतीश आचार्य 

बलात्कार की घटना श्रेष्ठता का पोषक  - 

ऐसा क्यों होंता इसके तह में जाने से आपको इसकी सच्चाई का भास होगा  कि हम इसके पीछे  छूपी  क्रूरता की सच्चाई को जान सकेगे | पुरुष की श्रेष्ठता का भाव , महिला की अधीनता का भाव , जातिगत श्रेष्ठता का भाव , जो अपने आपको को श्रेष्ठ और महिला को उनकी औकात समझाने में विश्वास रखता है | 

ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ | जब जातिगत श्रेष्ठता में मंद में पागल हुए लोगो ने एक नारी की आबरू  को फिर एक बार क्षीण करने का कार्य किया | यह उन तमाम मानवीय संवेदना को तार करने वाली घटनाओं  से बढ़कर है जो इसके पूर्व घटी  |

ऐसे अनगिनत केस भारतीय की गौरवपूर्ण भूमि पर आये दिन घटित होते रहते है | इस घटना में बच्ची के साथ बलात्कार किया गया , उसके गर्दन की हड्डी तोड़ी , रीड की हड्डी तोड़ी गई | लगभग १५ दिने को पश्चात् बच्ची ने तड़प तड़प के अपने प्राण त्याग दिए |

प्रशासन का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण रहा  - 

बच्ची का बलात्कार की घटना पर प्रशासन रवैया काफी चौकना वाला रहा | न्याय दिलाने के लिए नही अपितु न्याय को छुपाने के लिए रातो रात लड़की के शव को जला दिया गया | जबकि प्रशासन की नियमावली कहती है | जब तक कोई अनक्लेंम बॉडी न हो , तब तक प्रशासन उसका अंतिम संस्कार नही करती किन्तु इस घटनाक्रम में पूरा रुख बदलता हुआ दिखा | 

कुछ एक प्रावधानों के अनुसार  कुछ समय सीमा निर्धारित की गई |तय समय सीमा के दौरान कोई बॉडी पर क्लेम नही करता है तो प्रशासन उस  समय सीमा के समाप्त होने के पश्चात ही मानवीयता के नाते उस मृतक प्राय शरीर का दाह संस्कार करती है | जबकि हाथरस वाली घटना कांड में ऐसा नही देखने को मिला | 

पुलिस प्रशासन के द्वारा जबरदस्ती शव को जला दिया गया | माँ बगल में विलखती रही , लेकिन पुलिस प्रशासन के कानो तले जू नही रेगी |

हाथरस की बच्ची का तिहरा बलात्कार  - 

भारतीय परिवेश में बलात्कार के समान्यतौर पर दो स्वरूपों  देखनें को मिलते है | एक बलात्कार नारी का नारी होने के नाते किया जाता है | दूसरा बलात्कार दलित जाति में जन्म लेने के कारण  होता है और यदि लड़की गरीब परिवार में जन्म ले तो वो भी एक बलात्कार को ही जन्म देता है | किन्तु हाथरस की घटकना में इन तीन से इतर भी कुछ देखने को मिला| हाथरस की बच्ची का तिहरा बलात्कार किया गया | 

  1. पहला बलात्कार एक लड़की होने के नाते किया गया  | 
  2. दूसरा बलात्कार उनके शव को जलाकर उनकी आस्मियता के साथ किया गया |
  3. तीसरा बलात्कार न्याय की गुहार लगाते परिवार को धमकाकर किया गया |


जाति का हाथरस कांड में महत्वपूर्ण भूमिका  -

भारतीय समाज की सच्चाई कहे या आईना जाति एक ऐसा अभिशाप है , जो कभी नही जाती , जो लोग कहते है कि जाति बच्ची के बलात्कार का कारण नही बनती | उनको एक बार अपने अंदर छाककर देख लेना  चाहिए | मेरा प्रश्न उनसे है -

  1.  क्या वे जाति गत व्यवस्था से इतर है |
  2. क्या भारतीय समाज की यह एक कडवी सच्चाई नही  है | जाति , जो आधिपत्य का माध्यम या जरिया है जो आज से ही नही अपितु प्राचीन काल से ही चली आ रही है | 
  3. जाति अपने आपमें ही सर्वोच्चता और निम्नता के भाव को को प्रदर्शित करता है | ऐसे में जाति व्यवस्था की कुरूतियो को कैसे अलग किया जा सकता है |

जबकि जिनको अपराधी बताया जा रहा है | वो  स्वर्ण जाति से सम्बन्ध रखते है और भारतीय परिवेश से श्रेष्ठता और निम्नता का भाव तो सदा से बना रहा है | जिसे किसी भी आधार पर अलग नही किया जा सकता | 

ऐसी ही छवि  कुछ इस घटनाक्रम  में स्पष्ट रूप में दिखाई देती है | ऐसा भी बताया जा रहा कि  बलात्कार की घटना को खाजिर करने के लिए स्वर्ण परिषद बलात्कारियो के समर्थन में उतरे  है , जो इस बात का प्रमाण है की जाति जो कभी नही जाती तो फिर इस बलात्कार की घटना से जाति को कैसे अलग कर दिया जाए | 

असली अपराधी पेड़ के पीछे छुपा हुआ शक्स  - 

कहते है , न की कभी कभी आँखे से दिखाई देने वाली वस्तु आँखों का भ्रम /धोखा हो सकती है | शायद आपने प्लेटो के गुफा सिद्धांत का नाम सूना होगा | यह सिद्धांत इस बात का प्रणाम है | व्यक्ति जिसे सच  समझते है | असल में वो आँखों का धोखा होती है | 

क्योकि आँखे से दिखने वाली हर एक चीज सच नही हो सकती | इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति परछाई को ही हकीकत मान बैठता है | किन्तु सच्चाई तो इससे इतर है ,  जो हमारा बाहर इन्तजार कर रही होती है | जरुरत है उससे साक्षात्कार करने की  हाथरस की घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। 

दोषी के रूप में (DM , SSP , अन्य पदाधिकारियो को बताया जा रहा है किन्तु सच्चाई तो उससे इतर है | किसी प्रदेश के संचालन का उत्तर दायित्व जितना प्रशसनिक अधिकारों का उससे बढ़कर उनके लिए मानवीय मंत्रीगण जिम्मेदार है| 

ऐसे में जब इस घटना के जिम्मेदार के रूप में  DM , SSP , अन्य पदाधिकारिय को बताया जा रहा है| उतना ही मंत्रीगण भी किन्तु मीडियो बंदू को इतनी फुर्सत कहाँ की ये सवाल पूछे  |बाकी आपलोग खुद समझदार है |





आपका मित्र  व  लेखक   -  शिव कुमार खरवार 

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