एक नजर

Tuesday, 20 October 2020

जल संकट से निजात पाने के उपाय || water crisis in india

जल उन प्राकृतिक संसाधनों में से एक है जो जीवन प्रदान करता है | जल है तो जीवन है जल नही तो जीवन नही ,की धारणा प्राचीन समय से चली आ रही है |  जिन पांच तत्वों से मिलकर इस सृष्टि की रचना हुई उनमे से एक जल भी है | परन्तु इस प्राकृतिक संसाधन का आज इतना दोहन किया गया  | 



स्त्रोत - गिट्टी इमेज 

आज  विश्व के ज्यादातर देश जल  संकट से जूझ रहे है इसमें भारत , अमेरिका , चीन , थाईलैंड , जैसे देश सम्मिलित है | व्यक्ति बहुमूल्य आभूषण , आलिशान मकान , उपभोग की वस्तुओ के बिना तो जीवत रह सकता है | परन्तु यदि जल ही नही होगा तो अनाज कैसे उगेगा और जीवन की अन्य आवश्कता की पूर्ति कैसे होगी  |जब जीवन ही नही होगा , तो इन सभी वस्तुओ का उपभोग कौन करेगा | जल को एक साझा सम्पति के रूप में देखा जाता है | एक व्यक्ति अथवा समूह द्वारा किया जाने वाला जल का दोहन सभी जीवो – जन्तुओ पर एक समान रूप से प्रभाव डालता है|  बशर्ते किसी को इसका आभास पहले हो जाता है , तो किसी को इसका आभास बाद में होता है | आज भारत की  अर्थव्यवस्था का लगभग 6 % जीडीपी दर जल संकट से प्रभावित  है , ये सभी बाते जल के महत्त्व को बखूबी स्पष्ट करता है | आज जब हम किसी ग्रह पर जाने की बात करते है,  तो सर्वप्रथम वहां पानी के तत्व की ही तलाश करते है | पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह जहाँ जल पर्याप्त मात्र में उपलब्ध है| , पृथ्वी पर यदि कुल जल की बात की जाय तो  ७५.2 % धुवीय प्रदेशो में हिम यानि बर्फ के रूप में विद्यमान है |, कुल पानी का मीठा जल  2.७% है , जिसमें से केवल ०.4 % पानी ही भारत प्रयोग करता है  |, २२.6 % भूगर्भ है अन्य शेष जल झीलों , नदियों , वायुमंडल , नमी , मृदा , वनस्पतियों में मौजूद है | विश्व के विभिन्न देशो के द्वारा जल संकट से बचने  के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीकी का प्रयोग किया जा रहा है , फिर वह तकनीकी पारम्परिक हो अथवा आधुनिक ये मायने नही रखती , केवल जल का प्रबन्ध ही एक मात्र ऐसा तरीका है जिससे विश्व भर में उभरते जल संकट की समस्या से निजात पाया जा सकता है | पर्यावरणविदो , अर्थशास्त्रियो का मानना है की हमे जल प्रबन्धन के लिए परम्परागत तकनीकी का प्रयोग करना चाहिए क्योकि इससे पर्यावरण को किसी प्रकार हानि भी नही होगी और जल संरक्षण भी आसानी से हो सकेगा | जल प्रबन्धन के लिए हमे इजरायल , आस्ट्रेलिया जैसे देशो से सबक लेने की जरुरत है जहाँ का जल स्तर भारत के मुकाबले बहुत कम मापा गया  फिर भी वहां जल संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकी का प्रयोग कर जल प्रबन्धन के माध्यम से उत्त्पन होने वाले जल संकट से बचने का प्रयास किया जा रहा है | भारतीय परिवेश में ही नही अपितु विदेशो में भी जल संकट को प्रदर्शित करने के लिए कई फिल्मे तथा कुछ वेब सीरिज बनी जिसने जल संकट को बखूबी रूप से चित्रित करने की कोशिश की गयी जिसमे mad max fury( हॉलीवुड फिल्म ) , leila जैसी वेब सीरिज शामिल है | पानी मानव जीवन ही नही अपितु समस्त जीव जंतु के दिन-प्रतिदिन के क्रियाकलाप में विशेष महत्त्व है ,| फिर ऐसा क्या हुआ जोकी आज विश्व जल संकट से जूझ रहा है , इन्ही सभी सवालों के जवाब हम ढूढने की कोशिश करेगे |

                

  1. तो सबसे पहले प्रश्न यह उठता है कि जब जल ही जीवन का आधार है ,जल के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती , तो विश्व की ज्यादातर आबादी आज जल संकट क्यों जूझ रही है ?
  2.     जब जल ने ही मानव सभ्यता को शरण दी, मानव  की कितनी ही पीढ़ी का लालन पालन इन्ही जल से हुआ | समाज , राज्य के द्वारा  जल संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार की नीतियाँ  बनायी गयी, तो फिर ये जल संकट कैसे उत्त्पन हो गया  ?
  3. क्या इस जल संकट का जिम्मेदार स्वयं मानव है ? तथा इस जल संकट से कैसे बचा जा सकता है , इन तमाम बिन्दुओ पर हम प्रकाश डालेगे |

                                                                     जल संकट

सामान्यतौर पर जल संकट का तात्पर्य जल के स्तर में आयी कमी से लगाया जाता है जिसमे निर्धारित जल की आपूर्ति नही हो पाती है और लोग जल कि एक - एक बूंद  के लिए तरने के लिए मजबूर हो जाते है या आवश्कता के अनुपात में पर्याप्त मात्रा में जल का उपलब्ध न हो पाना जल संकट कहलाता है | 


जल संकट के लिए जिम्मेदार कारक

कारखानों  तथा नगर से निकलने वाले सीवेज अथवा नालो द्वारा लाइव असंशोधित जलमल , घाटो पर श्रध्दालुओ द्वारा प्रयोग की जाने वाली पूजन सामग्री , जलाई गई चिताओं की राख , संयोजित बस्तिया का अभाव , और नियोजित जलनिकास के अभाव ,कूड़े - कचरे के प्रबन्ध के अभाव , कचरे के साथ ही साथ  प्लास्टिक के कचरे बहुतायत मात्रा में ,ई कचरा , रासायनिक पदार्थ , नदी पर बने बांध ,जनसंख्या वृध्दि , वनों की कटाई ,नगरीकरण, औद्योगिककरण, लोगो द्वारा स्नान करते समय प्रयोग में लाये जाने वाले डिटरज , साबुन , स्नान , शवो को नदियों में विसर्जन , मृतक पशुवो को नदियो में फेकना ,औद्योगिक कारखाने से निकले वाले दूषित जल, खुले में शौच,ड्रिप बोरवेल ,ट्यूबवेल से पानी का इस्तमाल , सबमसिर्बल पम्म का घरेलू कार्यो में प्रयोग ,नदियों , तालाबो, झरनों को पाटा जाना ,अवैध खनन ,जल की फिजूल खर्ची (भारत में 19 करोड़ लिटर पानी प्रतिदिन कारो को धोने में खर्च किया जाता है | ),पर्यावरण का हद से अधिक दोहन जिसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग ,सरकार एवम प्रशासन का निराशाजनक व्यवहार ,भारत में सरकार के द्वारा पाइप लाइन के मध्यम से लोगो तक भेजी जाने वाली पानी का पाइप लाइन टूटे व् फूटे होने के कारण ४० % से अधिक जल का बर्बाद हो जाना ,अधिकरण इत्यादि |

भारत ही नही विश्व के वे तमाम देश , राज्यों ,अथवा शहर की  सूची जो  जल संकट से जूझ रहे है तथा जल संकट का प्रभाव |

आज विश्व की ४०० करोड़ आबादी जल संकट से जूझ रही है जिसमे से १०० करोड़ भारतीय  है |, 2018  में दुनिया भर में जल संकट से जूझ रहे शहर की सूची 1. चेन्नई 2. कोलकत्ता 3.तुर्की का शहर इस्तांबुल 4. चीन का चेदगू 5. थाईलैंड का बैंकाक 6. ईरान का तेहरान ७. इंडोनेशिया का जकार्ता ८. अमेरिका का लांस एंजेलिस ९. चीन का तिआंजिन १०.मिश्र की राजधानी काहिरा |भारत की बात करे तो चेन्नई , कोलकत्ता , मुम्बई ,हैदराबाद शीर्ष पर है |,भारत में २०३० तक ४० % आबादी को भी पिने के लायक साफ़ पानी नही मिल पायेगा | भारत की ४५०० नदिया सुख चुकी है 20 लाख करीब तालाब ,कुएं ,झील लुप्त हो गये  |उ०प्र० में पिछले सात सालो में ७७ हजार कुए सुख गये |यही बिहार में 4.5 लाख हैडपम्प सुख गये |भारत में ७० % आबादी प्रदूषित जल पिने के लिए विवश है |भारत में ३३ करोड़ लोग प्रत्येक वर्ष सूखे वाले स्थानों में रहने के लिए मजबूर है | देश (भारत )की कुल आबादी का ½ भाग सूखे के संकट से जूझ रहा है | विश्व बैंक  के अनुसार – भारत में २०३० तक  कुल जल आपूति का मांग 2 गुना हो जाएगा | १९९४ में प्रति व्यक्ति जल ६००० घन मीटर था जो २००० में घटकर २३०० प्रति व्यक्ति घन मीटर हो गया है |२०२५ तक आशंका जताई जा रही है की यह घटकर १६०० घन मीटर हो जायेगा | दुनिया की ½ हिस्सा सूखे के चपेट में है |१८० करोड़ लोग सूखे अथवा बंजर जगहों पर रहने के लिए मजबूर है | ज्योति शर्मा अध्यक्ष ऑफ़ फाॅर्स NGO  के अनुसार & NDTV NEWS   222 देशो के (प्रदूषित पानी ) जल संकट में कराये गये सर्वेक्षण के अनुसार भारत १२० वे स्थान पर रहा | नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार २०३० तक शहरों के  कई नदियों , तालाबो के सुख जाने की आशंका व्यक्त की गयी है |प्राकृतिक संसाधन की बात करे तो 30 % स्थल है ,जिसमे से ६५ % बंजर हो गये है |नीति आयोग के अनुसार प्रति वर्ष 2 लाख लोगो की मृत्यु स्वच्छ जल के न मिलने से के कारण हो रही है |

लेखक - शिव कुमार खरवार 


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