एक नजर

Monday, 12 October 2020

Scientific ideas about Gautam Buddha

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 Gautam Buddha in Hindi

नामगौतम बुद्ध
जन्म563 ईसा ० पूर्व ० (B.C )
जन्म स्थान  लुम्बिनी , नेपाल 
पिता का नाम  शुध्दोधन 
माता का नाम  महामाया 
पत्नी  का नामयशोधरा 
पुत्र का नाम  राहुल
  धर्म के संस्थापक  बौद्ध धर्म 
 प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ   
     मृत्यु 483 ईसा ० पूर्व ( B.C) 

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गौतम बुद्ध कौन ( who is gautam buddha in hindi  )  -

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भारत नही अपितु विश्व को शांति का सन्देश देने वाले महात्मा बुध्द  एक महान समाज सुधारक , दार्शनिक ,धर्म उपदेशक , चिंतक , थे | जिनका जन्म उस कालखंड में हुआ जब हिन्दू धर्म में अंधविश्वास , पाखंड , झूठ का बोलबाला था | मनुष्य के साथ मनुष्य की तरह व्यवहार नही किया जाता था | लैंगिक असमानत अपने चरम पर था | ऐसी पारिस्थितिय में गौतम बुध्द का जन्म हुआ | महात्मा बुध्द को इनके अटूट योगदान के लिए इन्हें लाइट का एशिया की उपाधि से नवाजा गया है |


भगवान विष्णु के नौवे अवतार है गौतम बुद्ध - 

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हिन्दू धार्मिक साहित्य का यह दावा करता है की गौतम बुध्द भगवान विष्णु के दसवें अवतार है | वैसे भारत की सर जमीन  पर अनेक देवताओं ने जन्म लिया है| हिन्दू धर्म में विष्णु के दस अवतार है जो निम्नवत है -

  1. मत्स्य 
  2. कुर्म 
  3. वराह 
  4. नरसिंह 
  5. वामन 
  6. परशुराम 
  7. राम 
  8. कृष्ण 
  9. गौतम बुद्ध 
  10. कल्कि 
इसकी सत्ययता कितनी इसके विषय में कुछ नही कहा जा सकता है |

    मोक्ष के सार तत्व की खोज करने वाले -

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    बुध्द ने लोगो के अंदर चेनता फुकने का कार्य किया है | महात्मा बुध्द मानव की सबसे बड़ी समस्या दुख के क्या कारण होते है इससे निदान कैसे पाया जा सकता है | इस बात को जाने के लिए आजीवन कार्य करते रहे  |  अंततः उन्होंने संसार में प्रचलित दुःख के कारणों की खोज कर डाली | महात्मा बुध्द का सारा जीवन मानवीय वेदना को समझने में लगा रहा | जीवन पर्यन्त लोगो को जागरुक करते रहे इसलिए तिब्बत के प्रसिध्द  बौध्द भीझु ने महात्मा बुध्द के बारे में कहा है कि - 

    गौतम बुध्द को दो शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है | पहला है  अभ्यास और दूसरा जागरूकता 

    महात्मा बुध्द के  जीवन  का इतिहास   - ( gautam buddha history in hindi  )

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    बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुध्दwho is gautam buddha in hindi )   का जन्म ५६३ ई ० पू ० में शाक्य गणराज्य के राजधानी ( वर्तमान में कपिलवस्तु के लुम्बनीय नामक ग्राम में हुआ था जब नेपाल का तराई क्षेत्र है | ) में हुआ था | महात्मा बुध्द को एशिया का पुंज ( लाइट ऑफ़ एशिया ) कहते है | जिसका साधारण का मतलब यह है की महात्मा बुध्द ने एशिया देशो में एक पुंज की भाति प्रकाश पहुचाने का कार्य किया है |महात्मा बुध्द के पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम महामाया था | महात्मा बुध्द के पिता शाक्य राज्य में राजा थे |महात्मा बुध्द के जन्म के मात्र सतावे दिन महात्मा बुध्द की माता का देहान्त हो गया |महात्मा बुध्द के बचपन का नाम सिद्धार्थ था | मात्र १६ वर्ष की अवस्था में महात्मा बुध्द का विवाह दण्डपाणी की शाक्य कन्या से महात्मा बुध्द का विवाह हो गया जिनका नाम यशोधरा था | जिनसे इनको राहुल नामक पुत्र का प्राप्ति हुई | महात्मा बुध्द की  शिक्षा - दीक्षा का कार्य गुरु विश्वमित्र के द्वारा सम्पादित किया गया | महात्मा बुध्द के वेड उपनिषद का गहन अध्ययन किया इसके साथ ही महात्मा बुध्द को युद्ध विद्या का भी अच्छा ज्ञान प्राप्त था | महात्मा बुध्द बचपन से ही बहुत चिन्तनशील व्यक्ति थे उन्होंने इनसे दुनिया का दुःख नही देखा जाता था | कहते है | महात्मा बुध्द के पिता ने एक रात्रि एक सपना देखा सपने में सात दृश्य इन्हें दिखे | जिसके पश्चात इन्होने अपने राज ज्योतिषी को बुलाया और अपनी सरे दृश्य की जानकारी दी | ऐसा भी बताया जाता है की महात्मा बुध्द के जन्म दिन के शुभ अवसर पर एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमे श्रेष्ठ महर्षि पधारे उन्होंने यह भविष्यवाणी की या तो यह महान राजा बनेगा अथवा समाज सुधारक क्योकि शुद्धोधन नही चाहते थे की इनका बच्चा साधु बने इसलिए इन्होने शुद्धोधन के लिए तीनो ऋतुओ के अनुरूप तीन महल बनवाए |महात्मा बुध्द  के भोग विलाश के लिए उन तमाम वस्तु का ढेर लगा दिया ताकि उनका ध्यान सन्यास की तरफ किसी हाल में न जा सके | किन्तु यह भोग विलाश की वस्तु  महात्मा बुद्ध का ध्यान नही घिच पाता |



    सांसारिक मोह का त्याग व सन्यास - (The abandonment and abandonment of worldly )
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    महात्मा बुध्द बचपन से ही चिन्तनशील व्यक्ति थे लिहाजन  महात्मा बुध्द  को सांसारिक मोहमाया अपनी तरफ आकर्षित नही कर पा रही थी |ऐसे में सांसारिक जीवन जी पाना अपने आप में चुनौती से भरा पड़ा था | एक दिन की बात है जब महात्मा बुध्द का सांसारिक जीवन से मोह टूट गया और वह सन्यास की दिशा में बढ़ाने में सहायक बनी और बची कुची कसर अन्य घटनाओ ने पूरी कर दी | जिससे गौतम  बुद्ध का हृदय बीवेदना से भर गया और  महात्मा बुध्द ने निश्चय किया की वह सन्यास धारण करेगे | 

    वे  कौन से चार दृश्य रहे जिन्होंने महात्मा  बुद्ध  को  सन्यास  लेने के लिए  प्रेरित  किया  - 
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    वो घटनाए निम्न है - यह वह  घटना  उस समय की है जब गौतम बुद्धा एक दिन वंसत ऋतू में बगीचे में सैर को निकले थे उन्होंने चार दृश्य देखे जिसमे 

    1. एक बुढा आदमी  को देखा जिसके दन्त टूट चुके थे | जिसके बाल पक चुके थे , शरीर झुक गया था | वह लाठी के सहारे चल रहा था | और कापते हुए सडक को पार कर रहा था |जिसकी आँखे धस चुकी थी | जो दुसरे के सहारे चल रहा था | 
    2. एक अन्य दृश्य देखा जिसमे चार व्यक्ति अक आदमी को अपने कंधे पर टांग कर ले जा रहे थे | इसके साथ अथवा उसके पीछे बहुत से लोग रो रही थी उसमे कुछ लोग छाती पिट - पीटकर रो रहे थे | 
    3. एक बीमार व्यक्ति 
    4. एक सन्यासी को देखा जो सांसारिक मोह माया से मुक्त था  |
    जिससे विचलित हो गए | तभी  महात्मा बुध्द ने  यह निश्चय किया की  वह  सन्यासी बनेगे | यह मृत्यु क्या है ? , यह बुढ़ापा क्या है ? , यह बिमारी क्या है , क्या  यह सदैव बनी करती है | तथा जन्म - मरण , दुखो से मुक्ति के क्या उपाय हो सकते है | सत्य क्या है | इन्ही सभी प्रश्नों के उत्तर की तलाश की चाह किये | महात्मा बुध्द  रात्रि के समय राजमहल से  सन्यास के लिए निकल पड़े | उस समय महात्मा बुध्द  मात्र २९ साल के थे जब इन्होने गृह त्याग किया जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिष्कमण कहा गया | गृह त्याग के बाद इन्होने सांख्य दर्शन की शिक्षा आलरकमल से प्राप्त की ऐसा बताया जाता है | आलरकमल  ही गौतम बुद्ध के प्रथम गुरु बने | 

    ज्ञान की प्राप्ति - 
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    महात्मा बुध्द  को  ६ वर्ष की कठिन तपस्या  के पश्चात ३५ वर्ष की अवस्था में वैशाख पूर्णिमा के रात्रि , नदी के तट पर स्थित एक पीपल के वृक्ष के नीचे  गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई | जिसे बौद्ध धर्म में कैवल्य कहा गया | जिस  स्थल पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई | वह स्थल बोधगया से जाना जाता  है अथवा स्थित है | गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश  सारनाथ में दिया जिसे महापरिभ्रमण चक्र कहा जाता है | 

    प्रथम उपदेश स्थल -
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    गौतम बुद्ध के प्रथम उपदेश सुनने वाले साक्षी उनके बौद्ध  भिझु बने | जिनके  नाम कौण्डिन्य ,वप्पा , महानामा और अस्सागी , भादिया है |


    महात्मा बुद्ध के उपदेश ( gautam buddha ke updesh/shiksha in hindi) -
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    महात्मा के उपदेशो के संग्रह को त्रिपटक कहते है जिसमे बुद्ध के सारे उपदेशो का सार है | महात्मा बुद्ध मनुष्य के दुःख का कारण का पता लगाया जिसे आर्य सत्य का नाम दिया है इसके अलावा दुःख से मुक्ति पाने के महात्मा बुद्ध आठ मार्ग बताए है जिन्हें उन्होंने अष्टागीन मार्ग कहा है | जो निम्नवत है - सांसारिक दुःख के कारण की चर्चा की जिसे चार आर्य सत्य कहा जिसमे शामिल है | -


    गौतम बुद्ध ने सांसारिक दुःख के क्या कारण बताए - 

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    दुःख -  महात्मा बुद्ध कहते है कि संसार में सर्वत्र दुःख ही दुःख है | जीवन दुःख अथवा कष्टों से भरा हुआ है | जिन्हें मनुष्य सुख समझा है असल में वह भी दुःख से परिपूर्ण है | मनुष्य को यह सदा भय सताता रहता है की कही उनके जीवन से सुख की समाप्ति न हो जाए | इसलिए आनदं की समाप्ति दुःख को आमंत्रित करता है | तृष्णा भी दुःख हो जन्म देती है मनुष्य संसार में चारो तरफ दुखो से घिरा हुआ है | इसलिए बुद्ध का मानना था की जीवन दुखो से परिपूर्ण है | 
    दुःख समुदाय - विज्ञान का एक बहुत प्रसिद्ध सिद्धांत है जिसे हम और कार्य - करण के सिद्धांत के रूप में जानते है | कहते का अर्थ यह है की प्रत्येक कार्य के पीछे उसके कुछ कारण होते है जिनकी वजह से कोई कार्य होता है ठीक उसी प्रकार दुख के का भी अपना एक कारण है जिसे तृष्णा (अज्ञानता ) के नाम से जानते है | तृष्णा अर्थात् किसी वस्तु के प्रति चाह है | जब तक व्यक्ति किसी वस्तु अथवा व्यक्ति के प्रति चाह रखता है | उसे दुःख की प्राप्ति होती है | 
    दुःख निरोध -  महात्मा बुद्ध का मानना है की दुःख का नष्ट किया जा सकता है | क्योकि प्रत्येक कार्य के कुछ कारण होते है | यदि उस कारण को ही समाप्त कर दिया जाए तो उस क्रिया ही नही होगी इसी बात को आधार बनाकर महात्मा बुद्ध ने कहा था की दुःख का अंत सम्भव है | इसके लिए तृष्णा का परित्याग है | 
    दुःख निरोधगामिनी प्रतिपादन -   महात्मा बुद्ध ने दुःख अंत करने के लिए अष्टांगिक मार्ग की बात कही जिनका पालन करके व्यक्ति दुखो में मुक्ति प्राप्ति हो सकती है |


    महात्मा बुद्ध ने  संसारिक दुखो से मुक्ति पाने के क्या उपाय बताए -           
    1.   सम्यक दृष्टि - वस्तु के वास्तविक स्वरूप का ध्यन करना |
    2. सम्यक संकल्प - आसक्ति ,द्वेष व हिंसा के विचार से मुक्ति |
    3. सम्यक वाणी - सत्य बोलना व अप्रिय बचनो का प्रयोग न करना  |
    4. सम्यक कर्मात -  सतकर्म करना अर्थात् अच्छे कार्य करना  |
    5. सम्यक आजीव -  सदाचार के नियमो का अनुसरण करते हुए आजीवन चलाना |
    6. सम्यक स्मृति -  मिथ्या धारणा का त्याग करना |   
    7. सम्यक समाधि -  मन को एकाग्र करना |
    8. सम्यक व्यायाम -  नैतिक , मानसिक , एवं आध्यात्मिक उन्नतिय के लिए व्यायाम करना |
      नोट - इन आठ मार्गो का पालन करके व्यक्ति दुःख से उबर सकता है |


      महात्मा बुद्ध ने सांसारिक दुखो से मुक्ति पाने के लिए आष्टांगिक मार्गो के अलावा दस शील की बात कही है जिनका पालन करके व्यक्ति सांसारिक दुखो से मुक्ति प्राप्त कर सकता है जो निम्नवत है - 
      1. सत्य 
      2. अहिंसा 
      3. चोरी न करना /अस्तेय 
      4.  मदिरा पान का सेवन न करना 
      5. असमय भोजन नकरना 
      6. सुखद आसन का त्याग करना 
      7. किसी भी वस्तु का आवश्कता से अधिक न इकट्ठा न करना /अपरिग्रह 
      8. धन का संयन न करना 
      9. महिलाओ से दूर रहना 
      10. नृत्य गायन न करना 

      नोट - इन दस शिलो का पालन करके व्यक्ति को निर्वाण की प्राप्ति हो सकती है | अर्थात्  तृष्णा का त्याग किया जा सकता है अथवा उसे नष्ट किया जा सकता है |

      बौद्ध धर्म की मूल मान्यताए - ( Basic beliefs of Buddhism )
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      1. अनीश्वरवाद 
      2. पुर्नजन्म में विश्वास 
      3. आत्मवाद 
      4. क्षणिकवाद 
      5. मूर्तिपूजा के विरोधी  
      6. अहिंसा में विश्वास 

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