एक नजर

Monday, 12 October 2020

आधुनिक युग में महात्मा गाँधी : एक दृष्टिकोण सत्य और अहिंसा के सम्बन्ध में || mahatma Gandhi in modern period

  

    आधुनिक युग में महात्मा गाँधी : एक दृष्टिकोण सत्य और अहिंसा के विशेष                                                            सम्बन्ध  में | 

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 किसी भी समाज को सभ्य , संस्कारी ,चरित्रवान, गुणवान एवम आचरणवान बनाने के लिए यह आवश्यक है की उस समाज में सत्य और अहिंसा को बढ़ावा दिया जाय , सत्य और अहिंसा वे मानक है जिनको धारण करके व्यक्ति जीवन के उच्च मूल्यों को प्राप्त कर सकता है ,प्रत्येक समाज का सम्बन्ध सत्य और अहिंसा से होता है क्योकि सत्य को धारण करने वाला समाज सदा खुशहाल रहता है वहां चोरी ,सत्य ,  डकैती , भष्टाचार जैसे अनैतिक कृत्यों के लिए कोई स्थान नही होता है ,जिस समाज में सत्य और अहिंसा का लोप हो जाता है उस समाज के व्यक्ति संस्कार विहीन , आचरण विहीन हो जाते है उस समाज के अन्दर लोभ , लिप्सा ( धन ,पद इत्यादी ) जैसे विकारो से घिर जाता है परिणाम स्वरूप वह समाज भ्रष्ट हो कर नष्ट होता है लोग एक दुसरे को मरने और मारने  तक को भी तैयार हो जाता है ऐसे समाज स्वार्थो को पूर्ण करने में लिप्त हो जाते है ,इसकी छवि वैश्विक , राष्ट्रीय , क्षेत्रीय , स्तर पर भी देखने को मिलती है इसको समझने के लिए विश्व के परिदृश्य को देखने की जरुरत है आज समूचे विश्व में व्याप्त हिंसा , बेरोजगारी , महगाई , तनावपूर्ण वातावरण से व्यक्ति घिर गया है जिसके  परिणाम स्वरूप सत्य और अहिंसा ही प्रासगिकता या भूमिका की बात उठाना लाजमी है इसे समझने की लिए हमे इतिहास की गर्द में जाने की जरुरत है प्रथम विश्व युध्द में होने वाले भीषण नरसंहार जिससे समूची मानव जाती का थर्रा उठाना जिसके परिणाम स्वरूप देशो के द्वारा मिलकर शांति के लिए लीग ऑफ़ नेशन की स्थापना करना इसको प्रमाणित कर देता है हिंसा से चीजो को थोड़े देर के लिए शांत किया जा सकता है पर इसे चिर काल तक नही बनाये रखा जा सकता है |

 


                                                 इमेज  -   महात्मा गाँधी 


 ग्रीन ने ठीक ही कहा है की ‘शासन इच्छा का परिणाम है न की बल का ”


दूसरी घटना अमेरिका के पेटागर में ९/११ के हमले के विरोध में जार्ज बुश के द्वारा समूचे आतकवाद के विरोध विद्रोह जिसके वावजूद शांति स्थापित नही किया जा सका , बल्कि अलकायदा , तालिबान , इस्लामिक स्टेट , जैसे संगठनों ने  अपने पाँव और भी फ़ैल डाले शांति के महत्व को पहचानते हुवे २००९ के अमेरिकी चुनाव को बराक ओबामा ने शांति को आधार बना कर जीता ,यदि भविष्य में फिर विश्वयुध्द लड़ा गया तो वो परमाणु युद्ध होगा जिससे समूची मानव जाती का ही नास हो जाएगा इस लिए  अहिंसा के महत्व को समझने की आज आवश्कता है गाँधीजी के जीवन में सत्य और अहिंसा का कितना महत्व है इसका आभास तो उसी समय हो गया सा नाथूराम गोडसे के द्वारा ३० जनवरी १९४८ को गोली मारे जाने पर भी गाँधी जी अपने सत्य और अहिंसा को नही छोड़ा जब जन सैलाब नाथूराम को मारने दौड़ा गाँधी जी ने उसे मारने से मना कर दिया भले ही गोपाल गोडसे  या नाथूराम गोडसे  १५० कारण गिना कर गाँधी को दोषी सिध्द कर दे पर वो अहिंसा के महान दूत है  और रहेगा   ..

संदर्भ सूची  -

  •         हिन्द स्वराज : गांधीजी
  •         सत्य के साथ प्रयोग  : गांधीजी
  •          इंडिया ऑफ्टर गाँधी : रामचंद्र गुहा ( in india today on youtube )
  •         सत्य और अहिंसा का दूसरा नाम गाँधी : (सरिता शर्मा : पंजाब केसरी न्यूज़ )
  •         वर्तमान समय में गाँधी की प्रासगिकता : सगोष्ठी ( प्रो.आर. के. मिश्रा )
  •         वर्तमान समय में गाँधी के दर्शन प्रासगिकता : नवभारत टाइम )
  •         सर्वोदय : महात्मा गांधीजी का सामाजिक दर्शन 

लेखक  -  शिव कुमार खरवार 

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