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Karl Marx In Hindi


Karl marx in hindi

धर्म लोगों का अफीम है का नारा देने वाले कार्ल मार्क्स का जन्म जन्म 5 मई 1818 को त्रेवेस (प्रशा) के एक यहूदी परिवार में हुआ था जो एक प्रसिद्द जर्मन दार्शनिक, राजनीतिक सिद्धांतकार , अर्थशास्त्री, इतिहासकार, राजनीतिक सिद्धांतकार, वैज्ञानिक समाजवाद ,समाजशास्त्री व पत्रकार थे जिनका पूरा नाम कार्ल हेनरिख मार्क्स था | कार्ल मार्क्स ने साहित्य, इतिहास और दर्शन का गहन अध्ययन किया था | इसके अलावा इन्होने कानून की शिक्षा  प्राप्त की थी | मार्क्स एक सफल पत्रकार एवं संपादक भी थे | किन्तु शासन के इनके लेख अरुचिकर लगे अथवा शासन व्यवस्था के विरुद्ध दिखे जिस कारण इनको अपना संपादन को बंद करना पड़ा किन्तु इन्होने लिखना नही छोड़ा पेरिस जाकर मार्क्स  ने द्यूस फ्रांजोसिश' जारबूशर पत्र में हीगेल के नैतिक दर्शन पर पत्र लिखते रहे | किन्तु शासन विरोधी लेख लिखने के कारण इनको वहाँ से भी निष्कासित कर दिया गया | तब वे ब्रूसेल्स चला गये जहाँ उन्होंने  जर्मनी के मजदूर सगंठन और 'कम्युनिस्ट लीग' के निर्माण में सक्रिय योग  ही नही दिया अपितु 1847 में एजेंल्स के साथ 'अंतराष्ट्रीय समाजवाद' का प्रथम घोषणापत्र (कम्युनिस्ट मॉनिफेस्टो) प्रकाशित किया | 1848 ई ० में मार्क्स  नेवे राइनिशे जीतुंग' का संपादन के माध्यम से जर्मनी में समाजवादी क्रांति बिगुल फुकने लगे | किन्तु १९४९ में मार्क्स को प्रशा से निष्कासित कर दिया गया | जिसके बाद मार्क्स लन्दन चले गए जहाँ 'कम्युनिस्ट लीग' की स्थापना का प्रयास किया, किंतु उसमें फूट पड़ जाने के कारण उसको भंग कर दिया गया | 1864 में लंदन में 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ' की स्थापना 1864 में लंदन में 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ' की स्थापना की बाद के वर्षो में किन्ही कारणों से इनको भंग करना पड़ा  , १४  मार्च  1883 को मार्क्स की मृत्यु हो गई | 

मार्क्स इस प्रगतिशील समाज के लिए कई नारे दिए जो -

मार्क्स के विचार 
  
साम्यवाद के सिद्धांत का एक वाक्य में अभिव्यक्त किया जा सकता है: सभी निजी संपत्ति को ख़त्म किया जाये।
अगर कोई चीज निश्चित है तो ये कि मैं खुद एक मार्क्सवादी नहीं हूँ।
बहुत सारी उपयोगी चीजों के उत्पादन का परिणाम बहुत सारे बेकार लोग होते हैं।
धर्म मानव मस्तिष्क जो न समझ सके उससे निपटने की नपुंसकता है।
नौकरशाह के लिए दुनिया महज एक हेर-फेर करने की वस्तु है।
पूँजी मृत श्रम है, जो पिशाच की तरह केवल जीवित श्रमिकों का खून चूस कर जिंदा रहता है, और जितना अधिक ये जिंदा रहता है उतना ही अधिक श्रमिकों को चूसता है।
सामाजिक प्रगति समाज में महिलाओं को मिले स्थान से मापी जा सकती है।
इतिहास खुद को दोहराता है, पहले एक त्रासदी की तरह, दुसरे एक मज़ाक की तरह।

इस दौरान मार्क्स ने कई पुस्तको की रचना की मार्क्स  के पुस्तके  - 

'द कम्युनिस्ट मनिफेस्तो' 
दास कैपिटल






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