HEADLINES

जानिए महान नायक बाबा साहेब के जीवन की पूरी कहानी ( Baba Saheb Ambedkar Hindi )

जानिए महान नायक बाबा साहेब के जीवन की पूरी कहानी ||Baba Saheb Ambedkar Hindi  

 _________________________________________________________________________________

baba saheb ambedkar hindi , biography of baba saheb bhim ambedkar in hindi , dra0 bhim rao ambedkar jivani in hindi , bhim rao raoji ambedakar in hindi , jivani baba saheb ki , jivani doctor bhim rao ambedkar ki
baba saheb ambedkar hindi


नामभीमराव रामजी अम्बेडकर
जन्म14 अप्रैल 1891
जन्म स्थान  मध्य प्रदेश के महू नामक नगर के सैन्य छावनी 
पिता का नाम  रामजी मालोजी सकपाल
माता का नाम  भीमाबाई 
पत्नी  का नामरमाबाई (प्रथम पत्नी ) , सविता (दूसरी पत्नी )
पुत्र का नाम  यशवंत अम्बेडकर 
  धर्म को धारण किया बौद्ध धर्म 
राजनैतिक दल इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी , शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन
,भारतीय रिपब्लिकन पार्टी
     मृत्यु 6 दिसम्बर 1956 



भारत ही नही अपितु विश्व के कई देशो में अपने व्यक्तित्व के कारण जाने वाले भीमराव रामजी अम्बेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे |यह एक प्रसिध्द विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। इसके साथ साथ  डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर अपने वाक्य पटुता एवं भाषा शैली के लिए भी ख़ासा जाने जाते है | इनका व्यक्तित्व इतना प्रभाव शाली था| 




हिन्दू जन्म लिए लेकिन हिन्दू मरे नही  -               
 _______________________________________________                                                                               
डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर यह बात भली भाति समझ गए थे | की भारत के अंदर हिन्दू धर्म में जातिगत भेदभाव को नही समाप्त किया जा सकता है | और न ही इसमें फलफूल रही छुआछूत नामक अभिशाप को भी समाप्त नही किया जा सकता | यही वजह  है | कि  डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने  कहा था की मै हिन्दू पैदा तो हुआ लेकिन हिन्दू मरूगां नही | इसका सीधा सा यह मतलब था की यह  मेरे हाथ में नही था कि  मै  हिन्दू घर में पैदा होऊ  अथवा  नही  किन्तु  मेरे हाथ में यह है की मै एक हिन्दू न मरू और यही वजह है की नागपुर में  2 लाख  लोगो के साथ  इन्होने बौध्द धर्म को धारण कर  लिया |  डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को भारत में दलित एवं  बौध्द धर्म के आंदोलन को एक नई दिशा देना वाले के नाम से भी जाना जाता है | यदि हम यह कहे की डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  बौध्द धर्म के पुर्नउत्थानकर्ता थे तो इसमें अतिशयोक्ति नही होगी | उन्होंने धर्म को चुना लेकिन गैरबराबरी को नही - बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ( 1956 )

                              
  • हिन्दू धर्म में कारण, विवेक और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नही है


कई भाषा के ज्ञाता -
________________________________________________


देश के अंदर  दलित व वंचितों की आवाज बनने वाले डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर भारत के प्रथम विधि विशेषज्ञ ,न्यायविद , एवं भारतीय संविधान के शिल्पकार  के रूप में जाने जाते है | जिन्होंने अपना पूरा जीवन दलित एवं वंचित व पिछड़े लोगो के लिए निछावर कर दिया | जो  कुल ९  भाषाओ के जानकार थे | जिसमे हिन्दी ,अग्रेजी , फ्रेंच , जर्मन , फारसी , मराठी और गुजराती , संस्कृत , पाली  इत्यादि | यही नही इन्होने कई धर्म का तुल्यात्मक अध्ययन करने का कार्य  भी किया था | जिसमे इस्लाम , इसाई धर्म , हिन्दू धर्म , बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म प्रमुख शामिल है | 

    
    जो कौम अपना इतिहास तक नही जानती है वे कौम कभी अपना इतिहास भी नही बना सकती है




baba saheb ki jivani , dr. bhim rao ramji ambedkar ki jivani , biography of dr. bhim rao ramji ambedkar  in hindi , biography of baba saheb in hindi
dr. bhim rao ramji ambedkar 

एक महान समाज सुधारक  - 
________________________________________________

महात्मा गाँधी से पूर्व डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  एक ऐसे सत्याग्रही  थे  | जिन्होंने पानी की लिए सत्याग्रह किया था लेकिन जिसका उल्लेख किताबो में नही देखने को मिलता है | जब भी इतिहास  के खघाले जाते है तो सर्वप्रथम देश में सत्याग्रह करने का श्रेय महात्मा गाँधी को दिया जाता है| किन्तु गाँधी से पूर्व अम्बेडकर ने दलित एवं वंचितों के लिए पानी के अधिकार के लिए की थी |जिसे महाड़ सत्याग्रह के नाम से जाने जाता है | उस समय जब की जानवरों को भी पानी पीने का अधिकार था लेकिन दलितों को प्राप्त नही था जो हिन्दू धर्म को घृणित संस्कृति को प्रदर्शित करता है | कई  हजार दलितों के साथ महार तालाब से पानी पीकर हजारो वर्षो से चली आ रही परम्परा को तोड़ने का कार्य किया | इससे पहले दलितों को सार्वजनिक तालाबो कुओ से पानी पीने का अधिकार नही था क्योकि यह हजारो वर्षो से ब्राहम्णवादी व्यवस्था के शिकार हो रहे था | 


  • इस देश में कितने महात्मा आये फिर भी आजतक छूत- अछूत बने हुए है |


कई विषयों के ज्ञाता -
_______________________________________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स  से अर्थशास्त्र विषय के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त की इसके अलावा डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने विधि और राजनीति विज्ञान  के विषय के क्षेत्र के अंतगर्त  शोध  का कार्य भी  किया है | यही नही  डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर अपने जीवनकाल में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने | इसके अलावा वकालत भी की |डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  दलितों वंचितों के आवाज को उठाने के इरादे से कई पत्र पत्रिकाओ का सम्पादन का कार्य भी किया है | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर सम्पूर्ण जीवन दलितों एवं वंचितों की भलाई के लिए लड़ते रहे या यु कहे की दलित वंचितों को समाजिक न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते रहे | 


                             न्याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है.



एक महान लेखक - 
_______________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनि व्यक्ति थे | उन्होंने कई विषयो का गहन अध्ययन किया था | उस अध्ययन को सार्थक बनाने के लिए डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर कई पुस्तक -एडमिनिस्ट्रेशन एंड फिनांसेज़ ऑफ़ द ईस्ट इंडिया कंपनी (एम॰ए॰ की थीसिस) , द एवोल्यूशन ऑफ़ प्रोविंशियल फिनांसेज़ इन ब्रिटिश इंडिया (पीएच॰डी॰ की थीसिस, 1917, 1925 में प्रकाशित),दी प्राब्लम आफ दि रुपी : इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन (डीएस॰सी॰ की थीसिस, 1923 में प्रकाशित),अनाइहिलेशन ऑफ कास्ट्स (जाति प्रथा का विनाश) (मई 1936),विच वे टू इमैनसिपेशन (मई 1936),फेडरेशन वर्सेज़ फ्रीडम (1936),पाकिस्तान और द पर्टिशन ऑफ़ इण्डिया/थॉट्स ऑन पाकिस्तान (1940) ,रानडे, गांधी एंड जिन्नाह (1943),मिस्टर गांधी एण्ड दी एमेन्सीपेशन ऑफ़ दी अनटचेबल्स (सप्टेबर 1945),वॉट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्स ? (जून 1945),कम्यूनल डेडलाक एण्ड अ वे टू साल्व इट (मई 1946),हू वेर दी शूद्राज़ ? (अक्तुबर 1946),भारतीय संविधान में परिवर्तन हेतु कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों का, अनुसूचित जनजातियों (अछूतों) पर उनके असर के सन्दर्भ में दी गयी समालोचना (1946),द कैबिनेट मिशन एंड द अंटचेबल्स (1946),स्टेट्स एण्ड माइनोरीटीज (1947),महाराष्ट्र एज ए लिंग्विस्टिक प्रोविन्स स्टेट (1948),द अनटचेबल्स: हू वेर दे आर व्हाय दी बिकम अनटचेबल्स (अक्तुबर 1948),थॉट्स ऑन लिंगुइस्टिक स्टेट्स: राज्य पुनर्गठन आयोग के प्रस्तावों की समालोचना (प्रकाशित 1955),द बुद्धा एंड हिज धम्मा (भगवान बुद्ध और उनका धम्म) (1957),रिडल्स इन हिन्दुइज्म , डिक्शनरी ऑफ पाली लॅग्वेज (पालि-इग्लिश) ,द पालि ग्रामर (पालि व्याकरण),वेटिंग फ़ॉर अ वीज़ा (आत्मकथा) (1935-1936), अ पीपल ऐट बे ,द अनटचेबल्स और द चिल्ड्रेन ऑफ़ इंडियाज़ गेटोज़,केन आय बी अ हिन्दू? ,व्हॉट द ब्राह्मिण्स हैव डन टू द हिन्दुज,इसेज ऑफ भगवत गिता,इण्डिया एण्ड कम्यूनिज्म,रेवोलोटिओं एंड काउंटर-रेवोलुशन इन एनशियंट इंडिया ,द बुद्धा एंड कार्ल मार्क्स (बुद्ध और कार्ल मार्क्स) ,कोन्स्टिट्यूशन एंड कोस्टीट्यूशनलीज़म, एवं पत्रिका का संपादन का कार्य किया |


    Dr. bhim rao ambedkar 

दलित आन्दोलन के अगुआ - 
________________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर का कार्य केवल दलित एवं वंचितों तक ही सिमित नही था फिर भी लोग समाज में एक ऐसी धारण बन गई है की डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर दलितों के मसीहा थे |एक  दृष्टि से देखा जाए तो वास्तव में डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर दलितों एवं वंचितों के लिए मसीहा  के ही समान है | क्योकि उस समय बाबा साहेब ने दलितों एवं वंचितो के अधिकारों की वकालत की जिस समय लोग बोलने से कतराते थे | इससे  पहले ऐसा  देखने को नही मिला मिला भी तो मामूली  इस लिहाज से देखे तो डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर दलितों के मसीहा ही थे |



                 खुद को दलित इसलिए मानते हो क्योकि दुसरो को उचा मानते हो


भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सम्मानित - 
________________________________________________________________________

भारत सरकार के द्वारा आजाद भारत एवं नये भारत के निर्माण व भारत के दलित एवं वंचितों की आवाज बनने के कारण या यु कहे की डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर के अमिट योगदान को ध्यान में रखते हुए  भारत सरकार के द्वारा डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को 1990 ई० में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सम्मानित किया गया | यह पुरस्कार डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को मरणोउपरांत प्रदान किया गया |डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर का जीवन बहुत कष्ट से गुजरा था |

  • यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।


बौध्द धर्म के पुर्नउत्थानकर्ता  - 
_______________________________________________________________________

हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरूतियो का शिकार होना पड़ा था | इस कारण डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने 1956 ई ० में बौध्द धर्म अपना लिया |यह कहते हुए की बौद्ध धर्म की मान्यताएं अन्य धर्मो में श्रेष्ठ है |डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर के उपलब्धियो को ध्यान में रखते हुए अथवा डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर की लोकप्रियता के कारण 14 को अप्रैल को डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर की जयंती के रूप में मनाया जाता है |



  • मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।

दलित के मसीहा -
_______________________________________________________________________

 डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर की प्रसिध्दी एवं लोकप्रियता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि आज डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर स्मृति को ध्यान में रखते हुए भारत के कई क्षेत्रो में इनके स्मारक बनाये गए |जो भारत के कई राज्यों में फैले हुए है जिनमे उत्तर प्रदेश , नई दिल्ली , आंध्रप्रदेश , मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र इत्यादि  | इसके अलावा डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को समाज का एक बहुत बड़ा तबका ईश्वर के रूप में मानकर उनकी आराधना करता है |


  •  मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं।

भारतीय रिजर्व  बैक स्थापना के विचारक -

______________________________________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर के विद्वानता की झलक भारतीय रिजर्व  बैक में प्रदर्शित होती है | या यु कहे की भारतीय रिजर्व  बैक  की आधारशिला डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर के विचारो पर रखी गई |

              
                किसी देश की सुरक्षित सेना किसी देश की सुरक्षित सीमा से कही बेहतर होती है


 जीवन परिचय -

______________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर का जन्म १४ अप्रैल 1991 ई० को मध्य प्रदेश (वर्तमान ) राज्य के महू नगर में स्थित एक सैन्य छावनी में हुआ था | यह क्षेत्र उस समय अग्रेजी हुकुमत के अधिकार क्षेत्र में आता था | इसके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल तथा इसकी माता का नाम भीमाबाई था |डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर अपने माता - पिता के १४ वे संतान थे | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर का जन्म  एक महार परिवार में हुआ था | या यु कहे की डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर एक महार जाति के व्यक्ति थे | इसके पिता ब्रिटिश ईष्ट इंडिया कंपनी में सूबेदार ले पद पर आसीन थे | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर दलितों व वंचितों के हो रहे अत्याचार के विरुध्द  सशक्त आवाज उठाने का कार्य ही नही किया  | बल्कि डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने  महिला अधिकार की वकालत करने वाले में अग्रिणी गिना जाता है | यदि डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को  महिला अधिकार की वकालत करने वाले चैम्पियन कहा जाए तो गलत  नही  होगा  | जिन्होंने अपना गुरु ज्योतिराव फुले को माना था | इनके मार्ग प्रज्ज्वलित करने वाले  मार्ग दर्शक के रूप में  बाबा साहेब ने  कबीर , फुले , बुद्ध  को माना है | जो इनके  प्रेरणा के स्त्रोत रहे  | और जनमानस के अंदर चेतना जागृत की | इससे पहले दलितों वंचितों के अधिकारों को समतामूलक समाज जी स्थापना के यही प्रेरक | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  जब केवल मात्र १५ वर्ष के थे |
उसी समय डॉ॰बाबासाहब अम्बेडकर का विवाह रमाबाई से कर दिया गया जो मात्र ९ वर्ष की कन्या थी | महार जाति में जन्म लेने के कारण डॉ॰बाबासाहब अम्बेडकर  के जातिगत भेदभाव का शिकार होना पड़ा था |या यु कहे की जातिगत भेदभाव जो वर्षो से हिन्दू धर्म में व्याप्त थी जिसने केवल डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को ही केवल प्रभावित कर रही थी बल्कि अनेक लोगो के  समाजिक व आर्थिक उत्पिड़ना का शिकार का कारण बना | वो सकता है वही वजह हो की इनका परिवार कबीर पंथ को मानता हो | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  मूलतः मराठी मूल के निवासी थे | 

बाबा साहेब की शिक्षा एवं कष्टों से भरा जीवन  -

______________________________________________________________________

डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  की प्राथमिक शिक्षा सातारा शहर में स्थित गवर्मेंट हाईस्कूल वर्तमान समय में प्रतापसिंह हाईस्कूल तथा माध्यमिक शिक्षा इन्होने मुम्बई शहर में एल्फीस्टोन रोड पर स्थित गवर्मेंट हाईस्कूल से इन्होने आगे की शिक्षा प्राप्त की |तथा स्नातक राजनीतिक विज्ञान एवं अर्थशास्त्र के क्षेत्र में  एल्फीस्टन कॉलेज से प्राप्त की | इसके अलावा डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने  संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित कोलम्बिया विश्वविद्यालय से परास्नातक (विषय - अर्थशास्त्र , इतिहास , समाजशात्र ,मानवशास्त्र ,दर्शनशात्र ) शिक्षा प्राप्त की | क्योकि डॉ॰ बाबासाहब  अम्बेडकर की आर्थिक स्थितीय सही नही थी | लिहाजन इनकी शिक्षा दीक्षा बिना छात्रवृति के संभव नही था|इसलिए डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर को अपनी शिक्षा के लिए सयाजीराव गायकवाड़ की छात्रवृति पर निर्भर रहना पड़ता था | जिसकी रकम 25 रूपये  प्रति माह दिए जाते थी | लन्दन स्कूल ऑफ़ इकॉनोमिक से अर्थशास्त्र के क्षेत्र में ८ मार्च  १९२७ ई ० डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की | 


  • शिक्षित बने, संघटित रहे और संघर्ष करे

दूसरा विवाह - 

______________________________________________________________________

१९३५ ई० में इनकी पति रमाबाई की मृत्यु बीमारी के कारण हो गई |१९४८ में डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने शारदा कबीर  ( बाद के वर्षो  में यही सविता के नाम से जानी गई )के विवाह कर किया जो एक ब्राहमण महिला एवं डॉ ० थी |

                 
                पति-पत्नी के बीच का संबंध घनिष्ठ मित्रों के संबंध के समान होना चाहिए।


दलित अधिकार के मांग करते रहे बाबा साहेब -

_______________________________________________ 

  1. डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  का मानना था की दलितों एवं जनजाति के लिए एक अलग निर्वाचन पध्दति अपनानी चाहिए |
  2. डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  का मानना था की दलितों एवं जनजाति के लिए  आरक्षण  प्रावधान होना चाहिए ताकि वह भी समाज की  मुख्य धारा में आ सके |
  3. दलित को उनके अधिकार को जानने एवं श्रेष्ठता का स्वाग रचने वालो से बचना की बात कही तथाश्रेष्ठता का स्वाग बातो न फसने की बात कही |
  4. महाड़ सत्याग्रह - इस आन्दोलन से तहत डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने  कई  हजार दलितों के साथ महाड़ तालाब से पानी पीकर हजारो वर्षो से चली आ रही | परम्परा को तोड़ने का कार्य  इससे पहले दलितों को सार्वजनिक तालाबो , कुओ से पानी पीने का अधिकार नही था | क्योकि यह हजारो वर्षो दलित ब्राहमणवादी व्यवस्था के शिकार हो रहे था | ब्राहमण ने इनको हजारो वर्षो से गुलाम बनाकर रखा था | जिन्हें छूना तक पाप माना जाता था | हिन्दू धर्म में जानवरों को भी सार्वजनिक तालाबो ,कुओ से पानी पीने का अधिकार था किन्तु दलितों को यह अधिकार नही दिए | उनको छूने से पाप लग जाता किन्तु उनकी बहु बेटी के साथ सोने पर उन  ब्राहमणों को पाप नही लगता | पता नही कितनी प्रथाए इन्होने चलाए जिसमे देवदासी  प्रथा का नाम काफी प्रसिध्द है | जिसमे कच कुआर लडकियों को भगवान के नाम चुने जाना जाता था | तब इन्हें  पाप  नही  लगता था |



  5. मनुस्मृति की प्रति जलायी १९२७ क्योकि इसके कई मान्यताए ,पद , एवं पाठ हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरूतियो को वैधानिक जामा पहनाने का कार्य कर रहा थे  | या यु कहे की जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे रहा था |
  6. १९३० ई ० में नाशिक  के कालाराम  मंदिर में  के १५ हजार पुरुष - महिलाए प्रवेश की इच्छा व्यक्त की किन्तु धुत ब्राहमण के द्वारा इसका विरोध किया | और मंदिर का फाटक बंद कर दिया गया |
  7. भारत में दलितों वंचितों की आवाज बनने वाली साप्ताहिक पत्रिका १९२० मूकनायक का सम्पादन किया | या यु कहे कहे की दलित के साथ होने वाले  उत्पिड़ना को इसमें  व्यक्त करने का कार्य करते थे  |
  8. दलितों एवं वंचितों के बराबरी को ध्यान में रखते हुए डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर  ने बहिष्कृत हित कारणी सभा का गठन किया | जिसका  मुख्य  उद्देश्य दलित वंचित को  जागरुक करना |
  9. पूना पैक्ट जिसे सम्प्रदायिक पंचाट के नाम से भी जाना जाता है | पैक्ट अथवा समझौता डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर एवं  कांग्रेस के अन्य सदस्यों के बीच हुआ जिसमे यह तय किया गया की दलित को आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया |किन्तु  डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ऐसा नही चाहते थे उन्होंने गोलमेज सम्मेलन में दलित एवं वचित लोगो के राजनैतिक प्रतिनिधित्व के समर्थक था | डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर की पुन पैक्ट के तहत यह शर्त रखी गई थी की दलितों को दो वोट देने का अधिकार होना चाहिए एक वोट का वह प्रयोग दलित प्रतिनिधि को चुनने में करेगा तथा दुसरे  वोट से  समान्य वर्ग के प्रतिनिधि का चुनाव करेगा | इस एक्ट की मूल बाते यह थी दलित का चुनन दलित ही करेग अ उसको चुनने का  अधिकार अन्य समान्य वर्ग को नही होगा |    
  10. १९३७ ई० कोकणी में चली आ रही पट्टेदारी व्यवस्था के विरुद्ध विधेयक का पास कराया |
  11. १९५६ ई ० में डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर यह बात स्पष्ट हो गई की हिन्दू धर्म में व्याप्त बुराई को समाप्त नही किया जा सकता उन्होंने अपनी पुस्तक जाति का उन्मूलन में हिन्दू में सुधार की सम्भावनाओं की जांच की है जिसमे उन्होंने बताया की हिन्दू धर्म की फसाद की जड़ जाति व्यवस्था है यही वह कारक है जो दलित वंचितों के शोषण का कारण  है |  जिसे समाप्त नही किया जा सकता | जिसका केवल ही मात्र तरीका है हिन्दू धर्म त्याग इस लिए इन्होने बहुत बड़े जन समूह के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया |इसके अलावा इस पुस्तक में डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने जाति व्यवस्था के उन्मूलन के लिए कई अन्य बाते कही है | लेकिन वो लागू नही हो सकता क्योकि हिन्दू धर्म रुढियो से जकड़ा हुआ है |
  12. मंदिर में पुजारियों के नियुक्ति के पक्ष लिया जिसमे सभी जाति , धर्म के लोगो को भाग लेने का अधिकार होगा , सभी लोग मंदिर के पंडा बन सकेगे |
  13. हिन्दू कोर्ट बिल का समर्थन - किंतु मत्रिमंडल के द्वारा इस विधेयक को न पास करने की स्थिति में मत्रिमंडल से त्याग आगामी कुछ वर्षो में हिन्दू कोर्ट बिल के कुछ बातो को पास कर दिया गया मूल रूप में हिन्दू कोर्ट बिल के मूल मान्यताओ को लागु नही किया गया | , विवाह , उत्तराधिका जिसमे पिता के धन पर पुत्री का अधिकार  ...
  14. डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर का मानना पढिए , आगे बढिए , संगठित होइए | शिक्षा वह जिससे आप अपने अधिकारों को जानते है इसलिए पढ़िए |
  15. समान नागरिक सहिंता के समर्थक - राज्य सभी नागरिक पर  एक समान  कानून लागु होगे चाहे वो किसी धर्म का हो |
  • हम सबसे पहले और अंत में भी भारतीय है.



राजनीतिक जीवन  का सफर  काफी  उतार चढ़ाव का रहा -
________________________________________________ 
  1. डॉ॰ बाबासाहब अम्बेडकर ने  १९३६ एक स्वतत्र मजदूर पार्टी का गठन किया |
  2. १९४६ में सविधान सभा के मेम्बर चुने गए | 
  3. रक्षा सलाहकार समिति के सदस्य बनाए गए 
  4. महात्मा गाँधी से विवाद -  क्योकि महात्मा गाँधी वर्ण व्यवस्था के समर्थक थे जो जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देता था |
  5. महात्मा गाँधी के द्वारा दिए गए शब्द हरिजन का विरोध , महाराष्ट्र में इसका बहुत बड़ा विरोध हुआ जिसका कारण हरिजन शब्द का दलित को दिया जाना था जिसका शब्दायिक अर्थ पर यदि ध्यन दिया जाए तो हम पाते है की ऐसा व्यक्ति जिसका पिता न हो | जिस कारण इसका विरोध बड़ा स्तर पर भी किया गया |
  6. वायसराय के कार्यकारी परिषद के मजदूरो के मंत्री बनाये गए |
  7. अनु० ३७० का विरोध इनका मानना था की यह भारत की अंतरिक्त भावना पर प्रहार है |


  • कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा  जरूर दी जानी चाहिए।


भारतीय समाज में व्याप्त असमानत को दूर करने के  उपाय    - 

________________________________________________

बाबा साहेब का मानना था की समाज में व्याप्त असमानत को चार तरह से दूर किया जा सकता है -

  1. राजनितिक प्रतिधिनित्व के माध्यम से - बाबा साहेब का मानना था की शासन व्यवस्था में समाज के विभिन्न अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियो का प्रतिनिधित्व होना चाहिए और यह प्रतिनिधित्व सरकार पर नियंत्रण स्थापित करने का कार्य करेगा | बाबा साहेब का मानना था की समाज के अल्प संख्यक लोगो का प्रतिनिधित्व जब वह स्वयम रखे | क्योकि वह उस समाज की खामियों एवं समस्याओ को भली भाति जानते होगे | एक बात जो बाबा साहेब ने स्पष्ट की थी वह यह है की मुद्दे को रखा जाना से ज्यादा मायने यह रखता है की उस मुद्दे को कौन उठा रहा है |
  2. सहकारी खेती के समर्थक -  भारत के कृषि प्रधान देश है | जहाँ आजीवका का मुख्य स्तरों के रूप में कृषि को माना जाता है | आजादी के पूर्व भारत में जमीन का मालिकाना हक उच्च जाति के लोगो का था तथा जमीदारो का था | ज्यादातर आबादी अपनी जीविका के लिए इन जमीदारो के खोतो  में काम किया करती था या यु कहे की समाज का बहुत बड़ा तबका भूमिहीन था | आजादी के बाद के समय देश में भूमि सुधर की व्यवस्था की निति लागु करनी थी तथा सहकारी खेती को बढ़ावा देना था  किन्तु यह  आज तक लागु नही हो सका |
  3. सेपरेट सेटलमेंट -   भारत में आजादी के पूर्व जजमानी व्यस्था प्रचलित थी जिसमे एक जाति दुसरे जाति पर निर्भर रहती थी | कही न कही यह निर्भरता उच्च जाति का निम्न जाति के शोषण का आधार बन रही थी जिस पर रोक लगाने के लिए बाबासाहेब सेपरेट सेटलमेंट की व्यवस्था की बात कहते है |
  4. पे बैक टू सोसाइटी -  बाबासाहेब का मानना था कि समाज में जिन व्यक्तियों की स्थिति अच्छी है इन्हें समाज में कमजोर लोगो की मदद करनी चाहिए ताकि उनकी समाज के निचले तबके को समाज की मुख्य शाखा से जोड़ा जा सके | यहाँ एक बात ध्यान देने योग है की बाबा साहेब ने आर्थिक सहयोग अथवा मदद की बात कही है | 

मृत्यु के अंतिम समय तक लिखना नही भूले बाबा साहेब - 

________________________________________________

अपने जीवन के अंतिम समय में बाबा साहेब बुद्ध और धम्मा नामक पुस्तक को लिखते रहे | क्योकि बाबा साहेब स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याओ से जूझ रहे थे अंत: बाबा साहेब की मृत्यु ६ दिसम्बर १९५६ को इनको मोक्ष की प्राप्ति ही गई |


  • जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके किसी काम की नहीं।

More - Gautam Buddha in Hindi ( जीवन परिचय )


            जानिए अम्बेडकर के अनमोल विचार
लेखक - शिव कुमार खरवार 

Share this:

Post a comment

 
Copyright © 2020 Society Of India . Designed by OddThemes