एक नजर

Tuesday, 10 March 2020

जानिए भारत में कचरा प्रबन्धन की समस्या और उसके समाधान || Waste In Hindi ( हिंदी )

( Waste In Hindi ) जानिए भारत में कचरा प्रबन्धन की समस्या और उसके समाधान


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Waste  In Hindi
   

कचरा प्रबंधन भारत की सबसे बड़ी चिंता का समस्या है | जिसके प्रमुख कारको के रूप  शहरीकरण ,ओद्योगिकरण  और  विकास की होड़ , जीवन शैली में हो रहे बदलाव है जिसकी वहज से आज कूड़े कचरे में तेजी बढ़ोत्तरी हो रही है | यही वजह है कि दिनोदिन कचरे के भार में और भी बढ़ोत्तरी होती जा रही है | ऐसे परिस्थितीय में  ग्रामीण  व  शहरी क्षेत्रो के कचरे निस्तारण की समस्या और भी बढती जा रही  है |

                                          

कचरा प्रबंधन की नीति  क्या ? what is Waste Managements policy

समान्यतौर पर कचरा प्रबन्धन की नीति का मूल उद्देश्य यह है | कूड़े कचरे से अधिक अनुमाप में से उपयोगी वस्तु को निकलकर जा और उससे प्राप्त ऊर्जा किया जाए इसी नीति को कचरा प्रबंधन कहते है ताकि उनको किन्ही खुले स्थानों  पर न फेका जा जाए |

कचरा प्रबन्धन में प्रमुख घटक - 

उपचारण 
निस्तारण 
पुन: चक्रण 
पुन : प्रयोग 
ऊर्जा में परिवर्तन करना 

कचरा क्या है  ( what is Waste ) - 

कचरा या अवशिष्ट का अर्थ होता है वह वस्तु है या वे चीजें जिनको उपभोक्ता उपयोग के लिए अनुपयोगी समझने लगता है | अथवा नकार देता है या उसका त्याग कर देता है | इस तरह के वस्तु  को खुले में फेंक देता है जिसका दुष्प्रभाव वातावरण पर  पड़ता है उसे कचरा कहते है ।


कचरे के प्रकार ( what is the type of  Waste)  - 

समान्यत : पर कचरे को कठोरता और तरलता के आधार पर दो भागो में में बांटा गया है |
  1. ठोस कचरा 
  2. तरल कचरा :  ऐसे अपशिष्ट पदार्थ जो लिक्विट रूप में हो उनको समान्यत : तरल अपशिष्ट कचरा करते है | तरल अपशिष्ट निम्नत : दो रुपो में देखने को मिलते है |  

  •  ग्रे पानी - ग्रे पानी तरल अपशिष्ट के वह रूप है जो ज्यादातर रसोईघर , सब्जी , किचन , बाथरूम , होटल , इत्यादि से उत्सर्जित किये जाते है | उनको समान्यत : दो वर्गों में बाटकर समझा जाता है |                                           (1 ) घरेलु ग्रे पानी 
                                                   (2 )  सामुदायिक ग्रे पानी 
  • काला पानी : ये तरल अपशिष्ट के वे रूप के कचरे होते है जिनमे शौचालय के रोगाणु मौजूद होते है | या यु कहे की यह शौचालय के पानी गंदे पानी होते है |
  इसके अलावा कचरों के नष्ट होने और न होंने  के आधार पर दो भागो में बांटा जाता है |
  1. क्षरणशील कचरा 
  2. अक्षरणशील कचरा 
नोट :    इस लेख के तहत ठोस कचरे के प्रबन्धन की मुख्यतः  बात कही गई  है  | ( What is solid waste management in hindi )

कचरा प्रबंधन की समस्या और मानव जीवन पर इसका नकारात्मक  प्रभाव   :The problem of waste management and its negative impact on human life

जिसकी वजह से कई प्रकार की बीमारियों  होने की सम्भावना बनी रहती है ऐसे में  लोगो को जन जीवन पर इसका ख़ासा ख़राब असर देखने को मिल सकता है | इसके अतरिक्त बड़े स्तर पर खाली भू भाग की आवश्कता पडती ताकि उन खाली स्थानों पर कूड़े - कचरे की डंपिंग किया जा सके जिसके एक प्रमुख कारण यह देखने को मिलते है कि जिन भूमि पर कूड़े - कचरे की डंपिंग होते है वहाँ का पारिस्थितिकीय तंत्र  बुरी तरह प्रभावित होता है | इसके अलावा वहाँ का जल , वायु , मुट्टी अलग प्रदूषित होती है और इसके अलावा उन स्थान- स्थान  पर कूड़े - कचरे के ढेर अलग लगे दिखाई पड़ते है | ऐसी परिस्थितिय में कूड़ा - कचरे का निस्तारण अति आवश्यक हो जाता है ताकि एक स्वास्थ्य समाज का निर्माण हो सके और  स्वास्थ्य  मुट्टी , जल का उपभोग कर सके व  शुध्द हवा में साँस ले सके क्योकि जल , वायु , मिट्टी तीनों आपस में ऐसे जुड़े हुए है कि किसी एक में आई अनियमितता दुसरे के ऊपर नकारात्क प्रभाव डाल सकती है |

भारत में ठोस कचरा प्रबंधन की प्रमुख उत्तरदायी संस्था : Major responsible organization of solid waste management in India -

भारत में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए देश के विभिन्न भागों में कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी के लिए कार्यरत संस्था निम्न है - 

पर्यावरण व वन और जलवायु परिवर्तन  मंत्रालय को ( ठोस कचरा प्रबंधन अधिनियम २००० के तहत अधिकृत किया गया है | जिसके अतंगर्त केन्द्रीय प्रदुषण बोर्ड , राज्य प्रदुषण बोर्ड , व प्रदुषण समितियो का उत्तर दायित्व है की वह कचरा प्रबंधन की निगरानी करे |इसके अतिरिक्त अन्य संस्था भी कचरा प्रबंधन में योगदान देते है जिनमे आवास और शहरी विकास मंत्रालय ,राज्य शहरीय मामले के विभाग , व स्थानीय निकाय ( शहरीय स्थानीय निकाय व ग्रामीण स्थानीय निकाय ) को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी  दी गई है 


कचरा प्रबन्धन कैसे करे (Process of waste management ) - 

इसके लिए यह आवश्यक है की सर्वप्रथम ग्रामीण स्तर , जिला स्तर , राज्य स्तर पर निम्न जानकारी इक्कट्ठा की जाए - 


  • आबादी   
  • परिवार के सदस्यों के आकडे लिए जाए 
  • क्षेत्र का मानचित्रण किया जाए 
  • दुकान , माल , जानवरों , बाजार हाट , उद्संयोगिक इकाईयों , अस्पतालों , मंदिरों आदि का ब्यौरा लिया जाए |
  • गम्पिंग के लिए रिक्त पड़े स्थानो की जानकारी 
  • विभिन्न सरकार व् गैर सरकार संगठनो की जानकारी रखना जो अवशिष्ट प्रबन्ध  के लिए कार्यरत है ताकि उनसे सहयोग माँगा जा सके | 

कचरा प्रबन्धन के उपाय (waste management controlling method )- कचरा प्रबंधन के प्रमुख पांच तरीके : Top five methods of waste management & other :

सूखे व गीले कचरे अलग करना |
घर घर जाकर कचरा इक्कठा करना |
रीसाईंकिलिंग करना

कूड़े कचरे के निस्तारण के लिए सयंत्रो का प्रयोग 
कूड़े कचरे के निस्तारण के लिए खाली स्थान 
भाष्मीकरण करना 
गैसीकरण व पैरोलिसिस करना 
कचरा का न्यूनीकरण अर्थात् कम से कम उत्सर्जित करना 
पुन: प्रयोग करना 
कचरा का संग्रहण करना 

इसके अलावा महिलापाल जी  ने अपनी पुस्तक  स्वच्छ भारत अभियान में कचरे के प्रबन्धन के चार पी माँडल की बात कही जो निम्नवत है - 

  1. नकारा जाए  
  2. कम करना 
  3. पुर्न उपयोग 
  4. पुर्न चक्रण में लाना 

कचरा प्रबन्धन के लाभ  ( Advanteges of waste management & Disadavantages of waste management & need of waste management ) -  

  • जनस्वास्थ्य की रक्षा हेतु 
  • आगजनी पर काबू करने ले लिए 
  • जहरीले पदार्थ के उत्सर्जन में कमी करने के लिए 
  • जल प्रदुषण पर रोक लगाने , वायु प्रदुषण में कमी करने के लिए 
  • बिजली उत्त्पन करने के लिए 
  • शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में बढ़ते कचरा के प्रभाव को कम करने के लिए 
  • कचरा के कारण उत्त्पन होने वाली  गंदगी पर रोक लगाने के लिए 

कचरा प्रबन्धन के उद्देश्य -  ( Aim of waste management )-

  • उपचारण 
  • निस्तारण 
  • पुन: चक्रण 
  • पुन : प्रयोग 
  • ऊर्जा में परिवर्तन करना
कचरा प्रबन्धन की नीतियों में बाधा ( Interruptions in waste management policies ) - 

  1. जनसंख्यादर तेजी से होती 
  2. मैला प्रथा 
  3. स्थाई भूमिका अभाव
  4. जागरूकता का अभाव
  5. खाली जगह का अभाव 
  6. लोगों की आर्थिक स्थिति का खराब होना
  7. भ्रष्टाचार 
  8. नगर पालिका की लापरवाही, अधिकारी एवं अनुशंसा का संरचना की लापरवाही
  9. कचरों की बढ़ती मात्रा
  10. बजट की किल्लत
  11. परंपरागत सोच मल निपटारे को लेकर ( इसमें जाति, 16.शुद्धता ,अस्पृश्यता इत्यादि कारण उत्तरदायी रहे)
  12. प्रमाणिक आंकड़ों और वास्तविकता आकड़ो के बीच ख़ासा अंतर 
  13. कर्मचारीयों की पर्याप्त संख्या में कमी 
  14. औद्योगिकीकरण 
  15. जीवन शैली में हो रहे बदलाव 
क्या कहती है रिपोर्ट ( What does the report say) -

दैनिक जागरण में छपे एक लेख में मुताबिक आज विश्व भर में  प्रतिदिन  कुल १.३ अरब टन कचरा उत्त्पन किया जाता है जिसका २०२५ तक २.२ अरब टन का उत्त्पन होने की आशंका व्यक्त गई ह

डाउन टू अर्थ में छपे  एक लेख के मुताबिक : भारत की आर्थिक विभाग ने अपने २०००९ के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि भारत की शहरी क्षेत्रो से ८० हजार मीट्रिकटन है | जिसका २०४७ तक २६० मिलियन टन होने की सम्भावना व्यक्त की है |  

योजना पत्रिका में छपे एक लेख के मुताबिक :  राज्य प्रदुषण  बोर्ड की २०१८ - १९ कि  रिपोर्ट  का हवाले देते हुए बताया की  प्रतिवर्ष  भारत में रोजाना  १५२०७६ तन कचरा उत्त्पन होता है जिसमे केवल ५५७५९  टन कचरे का निस्तारण होता है बाकी ५०१६१ टन कचरा खुले भू भाग पर फेक दिया जाता है | तथा ४६१५६ टन कचरे का हिसाब नही उपलब्ध है इतने कचरे का आखिर होता क्या है |

डाउन टू अर्थ में छपे  एक लेख के मुताबिक : कस्तुरंगन की अध्यक्षता में २०१४ में गठित योजना आयोग की समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि  माने तो भारत में प्रति व्यक्ति कचरा ०.४५ ग्राम है जिसक आधार पर यह कहाँ जा सकता है की भारत में प्रति वर्ष ६२ बिलियन  टन कचरा उत्त्पन होता है |

डाउन टू अर्थ में छपे  एक लेख के मुताबिक : सीपीसीबी की २००९ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत के जिन क्षेत्रो में ९० प्रतिशन कचरा निस्तारण की व्यवस्था पाई गई वहाँ कचरे के निस्तारण के लिए डंपिंग क्षेत्र में फैले मिले |

डाउन टू अर्थ में छपे  एक लेख के मुताबिक : शहरी आबादी औसतन : ३ से ३.५ प्रतिशत की दर से बढ़ रही जिससे कचरा के भार में ५ प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी हो आशंका व्यक्त की  है |

सत्याग्रह स्कोल में छपे एक लेख में मुताबिक भारत में ८० % कचरे का निस्तारण  उनको बीनकर किया जाता है |

निष्कर्ष -
भारत में कचरा प्रबन्धन एक बहुत बड़ी समस्या में से एक है ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए बहुत सी संस्थाए कार्य कर रही है लेकिन फिर भी अभी बहुत कुछ करना बाकी सत्याग्रह स्कोल में छपे एक लेख में मुताबिक भारत में ८० % कचरे का निस्तारण उनको बीनकर किया जाता है ऐसे जरुरत है  रणनीति की , कड़े कानून की ताकि कचरा प्रबन्धन की निति को क्रियान्वित किया जा सके ताकि एक स्वस्थ्य समाज निर्माण हो सके |

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