एक नजर

Sunday, 8 March 2020

कश्मीरी चाइल्ड "आसिफा" के दर्द को बयाँ करती कविता (Sad Poem in Hindi on Girl)

कश्मीरी चाइल्ड "आसिफा" के दर्द को बयाँ करती कविता (Sad Poem In Hindi on Girl)

एक लड़की जमीन मरी हुई है उससे मेरे (कवि) के द्वारा पूछा जा रहा
कि तुम इस दुर्दशा का शिकार हुई कैसे लड़की सारा वृत्तांत सुनाती है -

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कश्मीरी चाइल्ड "आसिफा" के दर्द को बयाँ करती कविता (Sad Poem In Hindi) 
                                    आभार : गूगल इमेज 


कवि के प्रश्न -

सांसो को क्यों रोके है
बोल न धरा पर क्यों लेटे है
क्या हुआ तुझे जो चुप्पी मारे बैठी है
जो इस जगत की चकाचौध को छोड़

यहाँ शांति में खोये बैठी है
न कोई सगा सम्बन्धी
न कोई घर ही आस पास दिख रहा
तो तू क्यों इस घनघोर जंगल में

सफेद चादर ओढ़ो लेटी है
फेद चादर ओढ़ो लेटी है
बोल न तेरी ये दशा हुई कैसे
जिसके कारण मुँह को मोड लेटी है

क्या नाम है तेरा ?
कहाँ से तू आयी है ?
क्या वो भी सब भुलाये बैठी है
ये तन पर कैसे निशान देख रहे

क्या तूने इसे खुद छपवाये है
या फिर किसी और तरह से आये है
इतनी छोटी उम्र में ही
तू यहाँ कैसे आई है

क्या रास्ता भूल गयी
या ये तेरी अंतिम विदाई है ।

लड़की का जवाब -

सुन ये अजनबी क्यों धरा पर लेटी हूँ
कैसे हुई दशा मेरी तुझे आज सारी व्यर्था बताउगी
सांसो को रोक नही सांसो को ही खो बैठी हूँ
इसीलिए इस चकाचौध भरे जीवन से मुह मोड़ बैठी हूँ

मैं तो नटखट बटिया थी अपने पिता की
मैं तो नटखट बटिया थी अपने पिता की
जो घर को मनसायन किये रहती थी
अभी तो बचपना भरा था मुझ में कूट कूट के

अभी तो बचपना भरा था मुझ में कूट कूट के
तो फिर भला कैसे शांत हो सकता थी ।
तू जानना चाहता था न क्यों
कोई सगा सम्बंधी नही दिख रहा

तो सुन ये अजनबी , जहां को मैं जा रही
यहाँ न सगा न सम्बन्धी साथ जाता
ये जीवन की अंतिम विदाई है
जो तू देख रहा सफ़ेद चादर ओढ़ो

वो सफ़ेद चादर नही कफ़न ओढ़ बैठी हूँ
वो सफ़ेद चादर नही कफ़न ओढ़ बैठी हूँ

तुझे जानना था न
क्या नाम है मेरा
कहाँ की रहने वाली हूँ
मेरा नाम है आसिफा है

मैं कश्मीर की रहने वाली हूँ
जो देख रहा है इस तन पर अंगुलियो के निशान
ये मैंने नही बनाये
चंद जालिमो की करतूत से आये

नोच नोच कर मेरे तन को बाटा सभी ने
तुमने सही कहाँ अजनबी ये मेरी अंतिम बिदाई है
पर इस तन से नही
बल्कि इस घृणित समाज से

जहाँ अभी भी महिलाओ को
भोग विलाश की वस्तु समझा जाता है
मुझे दुःख तो केवल इतना है की
मुझे दुःख तो केवल इतना है की

अपनों को छोडे जा रही हूँ
हाँ ये मेरी उस लड़कपन से विदाई है
हाँ ये मेरी उस लड़कपन से विदाई है
हाँ आज मैं उन्हें छोड़ जा रही

जिन्होंने मुझे प्यार दिया ,सम्मान दिया
हाँ ये मेरी अंतिम विदाई है
हाँ ये मेरी अंतिम विदाई है।

ये आँखे हमारी उन्हें तड़पते हुए देख नही सकती
कमजोर है दिल हमारा ये इससे ज्यादा दुःख सह भी नहीं सकती

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