एक नजर

Sunday, 8 March 2020

Morality Poem in Hindi

नैतिकता पर कविता || मैं नैतिकता कहलाती हूँ (Morality Poem in Hindi)

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नैतिकता पर कविता || मैं नैतिकता कहलाती हूँ (Morality Poem in Hindi)

    आभार : गूगल इमेज 
 मैं वो दर्पण हूँ जिसमे लोग अपनी अक्स तलाशते है
 फिर भी जाने क्यों आईने से रूबरू होने से कतराते है |


मैं अंतरात्मा की पुकार 
रहती तेरे अंदर हूँ
गलत -सही बतलाती हूँ
मैं नैतिकता कहलाती हूँ ।


न्याय मैं करवाती हूँ
‎समाज मे सबको 
उनका हक दिलवाती हूँ 
मैं नैतिकता कहलाती हूँ ।।

क्या बुरा है क्या भला है
अन्तर मैं बतलाती हूँ
गरीब हो या धनवान सबके मन मे आती हूँ
मैं नैतिकता कहलाती हूँ ।।।


न बधा हो कानून से 
‎फिर भी याद दिलाती हूँ  ‎
गलत क्या सही क्या फर्क मैं बतलाती हूँ
‎मैं नैतिकता कहलाती हूँ।।।।

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कवि - शिव कुमार खरवार 


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