Monday, 13 January 2020


               भारत में काफी पुराना है सेक्स वर्क का व्यापार  

आज भारत ही नही विश्व के ज्यादातर देशो में वेश्यावृति अर्थात देह व्यापार एक आम बात हो गयी है , महिलाये , लडकियां को इस वेश्यलयो की शौभा माना जाती है और यहाँ महिलाये या लडकियां कहाँ से आती है गरीब के घरो से , सुनसान राहो , काम के दिलाने के बहाने ,खरीद कर , मज़बूरी वश , जबरजस्ती उठाकर ,इत्यादि तरीको से इन्हें वेश्यालय में लायी जाती है | आज ऐसा कोई भी राज्य अथवा देश नही बचा है जहाँ से महिलाओ , लडकियों , को  वेश्यालय में के लिए सपलाइ न किया जाता हो | इन वेश्यालय में महिलायों की उच्ची बोली लगाई जाती है और उन्हें खरीद लिया जाता है फिर उन्हें मजबूर किया जाता है की वे देह व्यापार के लिए कार्य करे यदि वे ऐसा करने के लिए राजी नही होती तो इसके लिए नशीली दवाओं , या फिर किसी अन्य प्रकार का उन्हें भय दिखाकर यौन सम्बन्ध बनाने के लिए विवश किया जाता है |

    साभार - गूगल इमेज 

ऐतिहासिक पृष्टभूमि :

 वेश्यावृति अर्थात देह व्यापार हमारे भारतीय समाज में कोई नया शब्द नही है इस का वर्णन वेदों ,पुरानो , स्मृतियों , रामायण , महाभारत ,कौटिल्य के अर्थशास्त्र , देखने को मिलता है | वेश्यालय किसी भी समाज के लिए उपयुक्त नही मानी जा सकती है लेकिन समाज के बड़े तबके के द्वारा इसे सदैव किसी न किसी आधार पर उचित साबित करने की कोशिश की गयी | प्राचीन समय की बात करे तो विधि विधानों का सहारा बनाकर इस कुप्रथा को वैध घोषित किया गया वही  मध्य युग में अभिजात वर्ग गौरव एवम कलात्मक अभिरुचि के आधार पर इसे सही ठहराया गया | आधुनिक समय में इसे सामाजिक विवशता ,मानशिक विक्षेप, भोग की चाह में निरंतर वृद्धि के आधार इसे सही ठहराया गया | भारत में वेश्यावृति लगभग 30 % यौनकर्मी भारत में निवास करते है जिन महिलाओ को धन की आवश्कता होती है धन कमाने अथवा मजबुरी वश इसमें संलिप्त रहती है | आकडे बताते है की बहुत से महिलाए मज़बूरी वश ऐसा करती अथवा उन्हें मजबूर किया जाता है आल इंडिया नेटवर्क ऑफ़ यौनकर्मी ने कहा की महिलाए हालत के हाथो मजबूर होकर देह व्यापार को स्वीकार कर लेती है |भारत में ऐसा कई स्थान देखने को मिल जायेगे जहां देह व्यापार खुले आम चलता है |गुजरात के वादिया , मध्य प्रदेश का , उत्तर प्रदेश में स्थित नटपुरवा अर्थात नट जाती के लोगो के द्वारा जो देह व्यापार किया जाता हो |वाराणसी स्थित मंडुआडीह जैसे वेश्यालय इस देह व्यापार को चलाया जाता है |समय समय पर स्वयंसेवकों गैरसरकारी संगठनों के द्वारा इस प्रथा का विरोध किया | आज देश में कुल 11 सौ सत्तर रेड लाईट एरिया है इसमें व्यापारिक दृष्टि से कोलकत्ता और मुम्बई सबसे बड़ा व्यापार वाला क्षेत्र माना गया है | करोडो के अनुसार करोडो रूपये के साप्ताहिक व्यापार यहाँ होते है | भारत में राजस्थान , उ०प्र० , उड़ीस ऐसा स्थान है जहां वेश्यावृतिका इतिहास पुराना है सर्वप्रथम यहाँ गायन , नृत्य हुआ करते थे बाद में यही वेश्यालय में तब्दील हो गये |भारत में कुल यदि कुल यौन कर्मियों की बात करे तो १९९७ के 20 लाख थे जो बढ़कर २००३-०४ में 30 लाख हो गये |२००६ में महिला एवम बाल विकास विभाग के द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट यह बताती है की देश में कुल ९० फीसदी यौनकर्मी १५-३५ वर्ष के पायेगे |देह व्यापार के क्षेत्र में राजस्थान ,उ०प्र०, उत्तराचल सबसे आगे देखने को मिले १२-१५ वर्ष की युवतिया इन वेश्यालय में देखने को मिली | भारत की बात करे तो भारत में रोजाना २००० हजार रूपये का देह व्यापार होता है |राष्ट्रिय मनवाधिकार की रिपोर्ट के अनुसार ६८ % लडकियो की झासा देकर इन वेश्यलयो में लाया जाता है |मुम्बई के पुलिस दस्तावेज़ के अनुसार विदेशो से देह व्यापार के क्षेत्र में भारत लायी जाने वाली महिलाओ की बात करे तो उमसे उज्बेकिस्तान शीर्ष पर है |गृह मंत्रालय के २००७ के आकड़ो के अनुसार भारत में तमिलनाडू में कुल ११९९ मामले देखने को मिले और कर्नाटका देह के मामले ६१२ देखने को मिले | देश के ये वे ही दो देह व्यापार वाले  क्षेत्र है जो शीर्ष पर रहे |

   वेश्यावृतिके कारण मुख्य कारणों निम्न है :

1.      आर्थिक :

·        जीविकोपार्जन
·        आत्म नीरसता
·        अपनी एवम आश्रितों को क्षुधा को शनत करने के लिए
·        विलासिता
·        धन की आवश्कता
·        परिवार के आर्थिक आलात सही न होना
·        अल्वैतनिक
·        आलाच

2.      सामाजिक :

·        विवाह का अनिवार्य होना
·        समाज द्वारा मान्यता प्रदान किया जाना
·        दहेजप्रथा
·        विधावा विवाह पर प्रतिबन्ध का अभाव
·        सामाजिक बहिष्कार
·        अनमेल विवाह
·        तलाक प्रथा का अभाव
·        त्याग
·        सुखमय जीवन का लालच
·        आश्लिल साहित्य ,चलचित्र आदि |
  

3.      मनोवैज्ञानिक कारण

·        काम वासना की इच्छा
·        आत्म संतुष्टि

भारत में वैश्य उन्मूलन के लिए किये प्रयास :

भारत में वेश्यावृतिको रकने के लिए कोई ठोस नियम और कानून नही निर्मित किये गये है फिर भी भारत सरकार द्वारा भारतीय दंड सहिता १८६० के तहत वेश्यावृतिउन्मूलन कानून , और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम १९५६ पास किया गया , परन्तु ये कोई खास कामगर साबित नही हुवे |  

लेखक - शिव कुमार खरवार 

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