Gender Equality In India( हिन्दी में )

Gender Equality in India:Gender Equality in Hindi ( लैंगिक समानता दावे व हकीकत )

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लिंग के आधार पर भेद कोई नई बात नही है प्राचीन समय से ही भारतीय समाज में ये धारणा प्रचलित है की महिलाये पुरुषों से शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर होती है इसी बात को आधार बनाकर महिलाओ - पुरुषो के बीच कार्यो का बटवारा किया गया जिसे सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है | सार्वजानिक क्षेत्र से सम्बन्धित कार्यो का निर्वहन का दायित्व पुरूषों व निजी क्षेत्र के कार्यो का निष्पादन महिलाओं के द्वारा किया जाने लगा | gender equality in hindi के इस आर्टिकल में महिला एवं पुरुष  में भेदभाव (gender inequality )  पर विशेषचर्चा किया गया है | यही से महिलाओं की अधीनता व पुरुष वर्चश्व कि शुरुआत होती है | इस पर विभिन्न विद्वानों ने अपने अलग अलग मत व्यक्त किये है ताकि महिलाओं के समाजिक न्याय को सुनिश्चित किया जा सके जिन्हें विभिन्न नारीवादी दृष्टिकोण के रूप जानते है | 

नारीवादी दृष्टिकोण - 



नारीवाद एक महिला केन्द्रित धारणा /दृष्टिकोण अथवा आन्दोलन है जो की महिलाओं की पुरुषों के समान समानता की बात करती है साधारण शब्दों में कहे तो महिलाओ के समाजिक न्याय की मांग करते है जिसमे समाजिक , आर्थिक , राजनैतिक न्याय का भाव अंतनिहित है   



विवाह में स्त्री का व्यापारिकरण - विवाह की प्रक्रिया और महिलाओं का जीवन संघर्ष कि लेखक गीतेश ने जैसा की स्पष्ट किया है की नारीवादी चिंतन 

 "पुरुष प्रधान और पितृसत्ता और लिंग के आधार पर भेदभाव करने वाले समाज में महिलाओं कि सामाजिक परिस्थिति का अध्ययन करता है| " 

उदार नारीवादी : 

उदारवादी लोगो का मनना है कि समाज के द्वारा बनाई वे संस्कृतियां जो महिला भेदभाव, महिला अधीनता ,पुरूषवर्चश्व  को बढ़ावा देती है वह गलत है |

उग्र नारीवादी  : 

जैविक ( बायोलॉजिकल फैक्वटर ) जो प्रकृति प्रदत्त के आधार पर हो रहे भेदभाव ,  लैंगिक ( क्रिएटेड /कल्चरल  के आधार पर : समाज द्वारा निर्मित वे नियम अथवा कानून ,मूल्य व मान्यताए जो महिला अधीनता को बढ़ावा देती है |) के आधार पर महिलाओ के साथ हो रहे भेदभाव को अनुचित मानते है |

समाजवादी नारीवादी : 

समाजवादी लोग महिलाओं की अधीनता का मुख्य कारण आर्थिक स्थितिय को मानते है |महिला की अधीन स्तिथि इसलिए बनी रही है क्योकि पुरुषो का सम्पत्ति पर वर्चश्व हमेशा से कायम रहा जो महिला अधीनता का कारक बना |
, ब्लैक फेमिनिस्ट, इको-फेमिनिस्ट , विचारको के द्वारा महिला अधिकार की मांग तेज हो गयी और आज के भी परिवेश में महिलाओ के अधिकार की मांग जारी है |

लेख के अंतगर्त हम कुछ प्रश्नों के जवाब जानने की कोशिश करेगे - 

  • क्या भारत में लैंगिक समानता है  ?  (is there gender equality in india )  
  • भारत में  लैंगिक समानता कैसे प्राप्त किया जा सकता है ? ( how to achieve gender equality in india )
  • भारत में लैंगिक समानता को कैसे बढ़ा सकता है  ?  ( how to improve gender equality in india)
  • क्या भारत में लैंगिक समानता सम्भव है  ?   ( is gender equality possible in india )
  • आपको क्या लगता है भारत में लैंगिक समानता बनी हुई है ? ( do you think gender equality is persists in modern india ) 
                        
what is gender equality  : लैंगिक समानता क्या है ? -
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लैंगिक समानता का तात्पर्य समाज के द्वारा बनाई वे संस्कृतियां जो महिला भेदभाव, महिला अधीनता पुरूषवर्चश्व  को बढ़ावा दे उनको अनुचित मानते है तथा महिला व पुरुष दोनों के लिए समान संस्कृति की वकालत करती है , अवसर तथा संसाधनों पर पुरुषो के समान महिलाओं की सिफारिस करती है, राजनैतिक भागीदारी , समाजिक कार्यो में समान प्रतिनिधित्व , अवसर की समानता आदि लैंगिक समानता के सूचक है |समान्यतौर पर महिलाओं व पुरुषों के बीच संसाधनों व अवसर की उपलब्धता के रूप में जाना जाता है


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क्या भारत में लैंगिक समानता है |( is there gender equality in india )  - 

राष्ट्रिय परिवार सर्वेक्षण के मुताबिक महिला की स्वास्थ्य व शिक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है महिला के घरेलु हिंसा के वारदात कम हुवे है आकडे ये बताते है की पिछले कुछ दशकों में ३७.2 % से घटकर २८.८ प्रतिशत हो गया है |उसी प्रकार महिलाओं की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोत्तरी  व राष्ट्रिय व राज्य स्तरीय लिंगानुपात में सुधार हो यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है की समाज में महिला को भी पुरुषों के बीच भेद की जो रुढ़िवादी सोच है इसमें परिवर्तन हो रहा है |

भारत की राष्ट्रिय लिंगानुपात २००१ पर ८२१ प्रति १००० पुरुष जो २०११ में बढ़कर ९४३ हो गया व विभिन्न राज्यों के लिंगानुपात पर एक नजर केरला के लिंगानुपात २००१ में १०५८ था जो बढ़कर १०८४ हो गया है , आंध्रप्रदेश २००१ में ९७८ जो २०११ में बढ़कर ९९२ , उत्तर प्रदेश २००१ में ८९८ जो २०११ में बढ़कर ९०८ हो गया| 

महिलाओ की स्थिति के बारे में क्या कहता है  हिन्दू धार्मिक साहित्यों भारतीय समाज सदैव से ये दावा करता है की महिलाए उनके लिए  देवी के तुल्य है जिनकी तुलना को  दुर्गा , काली ,दमयन्ती , सीता , आदि से करके उनकी पूजा अर्चना करते है |महिलायों को पुरुषो की अरधागिनीय के रूप व्यक्त किया गया है तथा  विवाह को एक पवित्र बंधन के बताया गया है |

महिलायों की स्थिति में सुधार के लिए विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठन कार्यरत है | यह कार्य केवल राष्ट्रिय स्तर पर ही नही हो रहे है अपितु अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न सरकार व गैरसरकारी के द्वारा किये जा रहे है |महिलाओं की भागीदारी प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हो , रोजगार से व्यापार महिलाएं हर क्षेत्रो में बढ़ चढ़कर भाग ले रही है |भारत ही नही विश्व भर में   विधायकों , राजनैतिक दलों में महिलाओं  , के लिए कोटा में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है | ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गयी है | 

भारतीय सविधान में लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध तथा भारतीय संविधान में कुच्छ ऐसे प्रावधान किये गये ताकि महिलाओं को संरक्षण प्रदान किया जा सके अनु० १४,१५ ,१६ ,३९ ,२४३ इसके अलावा भारतीय संसद के द्वारा भी महिलाओं के संरक्षण के लिए समय समय पर प्रावधान किये गये | विधवा विवाह अधिनियम , घरेलु हिंसा अधिनियम इत्यादि |

  • भारतीय संविधान के अनु० १४ के तहत विधि के समक्ष समानता  का अधिकार 
  • भारतीय संविधान के अनु० १५  तहत के यह प्रावधान किया गया है कि वंश , जाति के आधार पर भेदभाव निषेध नही किया जाएगा 
  • भारतीय संविधान के अनु० १६ के  तहत अवसर की समानता की बात कही गई 
  • भारतीय संविधान के अनु० ३९  के तहत  समान कार्य के लिए समान  वेतन का प्रावधान किया गया है |
  • भारतीय संविधान के अनु० ५१ (ए ) अपमानजनक प्रथाओ का त्याग 
  • भारतीय संविधान के अनु० ४२ के तहत प्रसूति के समय सहायता 
  • अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम १९५६ 
  • दहेज प्रतिषेध  अधिनियम १९६१ 
  • कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम १९८४ 
  • सती प्रथा निषेध अधिनियम १९८७ 
  • राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम १९९० 
  • गर्भधारण पूर्व लैंगिक जाँच निषेध अधिनियम १९९४ 
  • घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम २००५ 
  • बाल विवाह निषेध अधिनियम २००६ 
  • कार्यस्थल पर महिला लैंगिक उत्पीडन निषेध अधिनियम २०१३ 
  • महिला के विरुद्ध अपराध दण्डविधि संशोधन २०१३ 

आपको क्या लगता है भारत में लैंगिक समानता बनी हुई है ? ( do you think gender equality is persists in modern india )  - 

  

कौशल्या बैसंती ने  अपनी पुस्तक दोहरे अभिशाप में स्पष्ट किया है ठीक वही स्थिति आज भी समाज में बनी हुई एक भेद भाव महिला महिला होने के नाते सहन करती है तो दूसरा नीची जाति में जन्म लेने के कारण सहन करती है |


ऑनलाइन शोधपत्र में छपे एक पत्रिका जिसका शीर्षक है स्त्रीकाल स्त्री का समय और सच के अनुसार  आज भी जब घर में लड़का जन्म लेता है तो सोहर गाये जाते है खुशियाँ मनायी जाती है  जबकि लडकी के जन्म के समय ऐसा नही देखने को मिलता है हाँ समाज में कुछ बदलाव आये है ये बदलाव मामूली है |आज भी लडके को कुल का दीपक के धारणा हमारे समाज में प्रचलित है लडकियों को आज भी पराया धन के रूप में देखा जाता है |


डॉ० भीम राव अम्बेडकर  "किसी भी समाज का मूल्याकन इस बात से लगाया जा सकता है की उस समाज में महिलाओं की स्थिति क्या है " 

सत्याग्रह स्कोल के लेख हमारी दुनिया के कपड़े तक लिंगभेदी है में स्पष्ट किया गया है हमारे समाज की संरचना ही कुछ ऐसी है लकड़ो व लडकियों में कपड़ो को भी लेकर भेद किया जाता है यहा तक की बच्चो और बच्ची तक के कपड़ो में भी लिंग आधारित भेद देखने को मिल जायेगा |


 फ्रांसीसी लेखिका सिमोन द बोव्हुआर ने फ्रांसीसी भाषा में लिखी अपनी पुस्तक अग्रेजी में                            द सेकेण्ड सेक्स में कहा नारी जन्म नही लेती बल्कि बनाई जाती है  
घरेलु कार्यो को करने का  दायित्व केवल महिलाओं का ही है पुरुष खाना नही बना सकते ,झाड़ू नही लगा सकते यह कार्य महिलाओं का है ये सभी बाते लिंग आधारित भेद को ही प्रदर्शित करती है |
विधायको व राजनैतिक दलों में महिलाओं के कोटा में कितनी बढ़ोत्तरी की गयी इसका कोई आकड़ा ही नही |
ग्रामीण स्तर पर भले ही महिलाये ग्राम प्रधान बन गयी हो जो मात्र सैद्धन्तिक आधार को प्रदर्शित करता है वास्तव आज भी ग्राम प्रधान के चेहरा तो महिला का होता है परन्तु वास्तव में सभी कार्य प्रधानपति के द्वारा क्रियान्वित किये जाते है |
हिन्दूधर्मशास्त्रों में कुल सोलह संस्कार जिक्र किया गया (गर्भाधान संस्कार , पुंसवन संस्कार , कर्णछेदन संस्कार , जातकर्म संस्कार आदि ) जिसमे कुछ संस्कारों में स्पष्ट रूप से लिंग आधारित भेद देखने को मिलते  इसमें  माँ (स्त्री ) के प्रति चिंता को नही प्रदर्शित किया गया है बल्कि एक स्वस्थ संतान की चाह व उनकी सुरक्षा को प्रदर्शित करते है| 
( gender roles in india ) भारत में लैंगिकता की भूमिका -

बदलते दौर में एवं समय की मांग को देखते हुए महिलाए  भारत देश  के प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही चाहे तकनीकी का क्षेत्र को व्यापार को वो , साहित्य का हो , खेल का , या फिर भारत की सीमा के रक्षा का दायित्व हो भलीभांति निभा रही है | महिलाए  मानव जीवन प्रत्येक पहलु  ( सामाजिक , राजनैतिक , आर्थिक , सांस्कृतिक , तकनीकिय , स्वास्थ्य , कृषि , उद्योग  ) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है |



(gender inequality in india) : भारत में लैंगिक असमानता -

श्रम शक्ति के क्षेत्र में महिला 
(Gender Equality In India) -  द वाल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक ४४ % महिलाए कोई कार्य नही करना चाहती जबकि २४ % महिलाए कार्य करना चाहती है | भारत में केवल  27% महिलाए ही श्रम शक्ति का कार्य करती है | श्रम शंक्ति के तहत कई  क्षेत्र आते है जिसमे कृषि , शिक्षा , उद्योग इत्यादि शामिल है | यू० एन० बिजनस फोरम में छपे एक लेख लैंगिक समानता : महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण लेख के मुताबिक भारत में महिलाओं की भारत की जीडीपी दर में 17% भागीदारी है वही विश्व पुरे में औसतन ३७ % बताया गया है इस लेख में ये भी बताया गया की आईएफएम को आधार बनाकर ये बताया गया की यदि महिलाये भेदभाव न किया जाय तो देश की कुल जीडीपी में २७ % कि बढोत्तरी २०२५ तक देखी जा सकती है | 

(gender equality in education ) शिक्षा के क्षेत्र में महिला 
-  भारत सरकार के २०११ के जनगणना के मुताबिक भारत में पुरुष का शिक्षादर जहाँ ८२ % है | जबकि महिला का साक्षरतादर  केवल ६३ % है | भारत में १२ तक शिक्षा प्राप्त करने वाली  प्रत्येक १०० लडकियो में से एक लडकी १२ तक की शिक्षा प्राप्त कर पाती है | भारत  में ४० % लडकी  5 की पढ़ाई के पूर्व शिक्षा छोड़ देती है |the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा देखने को मिला की पुरुषो की तुलना में महिलाओ ने  स्कूली शिक्षा  कम समय में व्यतित किये है | महिलाओ ने शिक्षा 4.७ वर्षो तक में शिक्षा छोड़ी है तो  पुरुषो ने ८.2 वर्षो में  

लैंगिक भुकतान के क्षेत्र में महिला
 - भारत में  एक ही कार्य को पुरुष और महिला करते है  किन्तु पुरुष को महिला के मुकाबले  25 % ज्यादा पैसे दिए जाते है | जो औसतन ३८ प्रतिशत है जबकि शोध कर्ताओ का मानना है की लैगिक आधार पर समान कार्य के लिए पेय दर ६७ प्रतिशत है | जबकि भारत में ४७ प्रतिशत महिलाए कृषि के कार्य करती है | लैंगिक आधार पर समान  कार्य  के लिए  भुकतान में  अंतर का  अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है की २०१४ में २८९ रूपये एक कार्य को करने के लिए पुरुष को दिए जाते थे जबकि महिला को केवल 219 रूपये दिए जाते है जो लैंगिक आधार पर पेय में अंदर का २४ प्रतिशत है | २०१५ में पुरुष को २८९ दिए जाते थे तो महिला को २१० रूपये दिए जाते थे | जो लैंगिक आधार पर भुकतान में अंतर का 27 है | २०१६ में पुरुष को ३४६ रूपये दिए जाते थे तो महिला को २६० रूपये दिए जाते थे जो कुल लैंगिक आधार पर भुकतान में अंतर का 25 % है |  ( फेमलराईट.कॉम / मोस्टरकाम/वेजइन्दिकेटर फाउंडेशन )

सम्पति के अधिकार के क्षेत्र में महिला
 - आज भी कई लडकियो को साथ भेदभाव भाव किया चाहे व शिक्षा का क्षेत्र हो या रोजागार का बीबीसी के लेख ये महिलाये है इन्हें कम वेतन दो में बताया गया की आज विश्व में बहुत से देशो में महिलाओं को पुरुषो से कम वेतन दिए जाते है भारत में ये ये गैरबराबरी की तुलना में कहा की भारत की भी स्थिति कमोवेश उन्ही के समान है  इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया की १४२ देशो की सूची में भारत इसमें ११४ पायदान पर है जो दर्शाता है की आज भी भारत में महिला असमानता कितना ज्यादा है | center for the advance studies of india छपे एक लेख के मुताबिक भारत में अभी महिलाओं की सम्पत्ति के अधिकार में उनकी भागीदारी १३ %( भूमि के मालिकाना के लिहाज से )  है जबकि भारत भारत उत्तराधिकार में अधिनियम कब का पास हो चूका है |
(Gender Equality In India)
  विवाह ने महिलाओं को वैधानिक वैश्यावृति को जामा पहनाने का कार्य किया है |



जेंडर गैप इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक 
 -आज भी महिलाओं की स्थिति समाज सोचनीय जिसका अनुमान य़ू०एन०ओ० की महासभा की २०१५ की उच्च स्तरीय बैठक से लगा सकते है जिसमे 17 सतत विकास लक्ष्यों में से एक लैंगिक समानता शामिल करना स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि भारत में ही नही दुनियाभर में लैंगिक असमानता समाके लिए एक गहन चिंता का विषय है जिसमे भारत सहित दुनिया भर के १९३ देशो में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया | वर्ल्ड इकोनोमीक फॉर्म के मुताबिक की जेंडर गैप इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में ६५ % लैंगिक भेदभाव को ख़त्म किया है लेकिन अभी भी महिलाओं व पुरुषों के बीच लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने में २०२ वर्ष लग जाने सम्भावना व्यक्त की गयी |भारत में लैंगिक भेदभाव ६६ % तक पाया गया वही दक्षिण एशिया देशो में ६५ % पाया गया |आज भी कई लडकियो को साथ भेदभाव भाव किया चाहे व शिक्षा का क्षेत्र हो या रोजागार का बीबीसी के लेख ये महिलाये है इन्हें कम वेतन दो में बताया गया की आज विश्व में बहुत से देशो में महिलाओं को पुरुषो से कम वेतन दिए जाते है भारत में ये ये गैरबराबरी की तुलना में कहा की भारत की भी स्थिति कमोवेश उन्ही के समान है  इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया की १४२ देशो की सूची में भारत इसमें ११४ पायदान पर है जो दर्शाता है की आज भी भारत में महिला असमानता कितना ज्यादा है |द वायर न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक लैंगिक समानता सूचकांक में १२९ देशों में भारत ९५ पायदान पर जो स्पष्ट करने के लिए काफी है महिलाओं समाज में अभी क्या स्थिति है | the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक कुल चार क्षेत्र का अध्ययन पर आधारित है जिसमे आर्थिक भागीदारी और अवसर की समानता , शिक्षा , स्वास्थ्य , राजनैतिक शक्तिकरण को शामिल किया गया | जनसख्या के आधार  महिला एवं पुरुष के बीच 31.4 % गैप को समाप्त किया जा चूका है जबकि ६८.6 का गैप अभी भी विद्यमान है |जिसमे भारत को ११२ रैंक प्राप्त हुआ है जबकि भारत के पडोसी राज्य की स्थितिय अच्छी है जिसमे नेपाल ( 102 ) , श्रीलंका( 102 ) , बंगलादेश (५०) , चीन (१०६ ) रहा |आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में महिला के मजदूरी के आधार पर आका गया जिसमे पाया गया की २०१७ -१८ के दौरान आर्थिक भागीदारी २३. 3 % रहा | २०१८ में इसमें कुछ बढ़ोतरी देखने की मिली यह बढकर 26.९ % हो गई | पुरे विश्व में महिला औसतन ४८.४७ है |  | स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पुरुषो को महिलाओ से अधिक वरीयता दी जाती है | और महिलाओ को स्वयं का उपचार करने के लिए कहा जाता है | ताकि वह  स्वयं  शिक्षित हो जाए उन्हें डॉ के पास बार न ले जाना पड़े अथवा बार बार पति से इसकी शिकायत न करे |शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा देखने को मिला की पुरुषो की तुलना में महिलाओ ने  स्कूली शिक्षा  कम समय में व्यतित किये है | महिलाओ ने शिक्षा 4.७ वर्षो तक में शिक्षा छोड़ी है तो  पुरुषो ने ८.2 वर्षो में  शिक्षा छोड़ी | 

लैंगिक आधार पर हिंसा के क्षेत्र में   विवाह में स्त्री का व्यापारिकरण - विवाह की प्रक्रिया और महिलाओं का जीवन संघर्ष कि लेखक गीतेश कुल नोऊ लडकियों का सैंपल लिया जिसे इन्होने G1 से G10 तक नाम दे दिया उसमे पाया गया की चाहे रोजगार करने वाला लड़का हो अथवा बेरोजगार दोनों ही अपना गुस्सा लड़की को पीटकर दिखाते है शराब पीते है और लड़की को पिटते है इन्होने अपने लेख के अंतगर्त चार प्रकार की हिंसाओं का वर्णन किया है शारीरिक हिंसा , मानसिक हिंसा , मौखिक हिंसा , यौन हिंसा | इसके अलावा हमारे समाज में लिंग आधारित भेदभाव का सबसे बड़ा उदाहारण महिलाओं के लेकर बनी भद्दी भद्दी गालियाँ जो न सुनने में अच्छी न ही बोलने में फिर महिलाओं को महिलाओं के सामने ही भद्दे भद्दी गलियां दी जाति है माँ को लगाकर , बहन को लगाकर और हमारा समाज उसे सहजता से स्वीकार भी करता है |कही न कही विवाह ने नारी को सम्पत्ति के रूप में निरुपित करने का कार्य किया है| इससे महिलाये क्रय -विक्रय की वस्तु बन गयी आज भी बहुत से ऐसा राज्य है जहाँ विवाह महिला हिंसा , भेद का प्रमुख कारण बना इसने तस्करी की वस्तु के रूप में महिलाओं को दिखने का कार्य किया है |बीबीसी की रिपोर्ट १२९ देशो के सर्वे में पाया की आज भी भारत महिलाओं की स्थिति बहुत बुरी है | रिपोर्ट बताती  है की आज भी भारत में लिंग के आधार पर भेद कायम है भारत में महिलाओं के साथ हो रहे घरेलु हिंसा के सम्बन्ध में राय लिया गया जिसमे ५१  % पुरुषो के घरेलु हिंसा ( पिटाई ) को सही माना यहाँ तक भारतीय महिलाओं के दिमाग में भी ये बात घर कर गयी रिपोर्ट ये भी कहती है भारतीय महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा से सही मानता है |जो कुल महिलाओं का ५४% है | 

मिडिया के क्षेत्र में महिला  वैश्विक महिला निगरानी योजना के रिपोर्ट के मुताबिक  महिला का प्रतिनिधित्व मीडिया , न्यूज पेपर , कहानी , टेलीविजन के क्षेत्र में कुल ३७ प्रतिशत है | भारत में न्यूज के क्षेत्र में पुरुष ७८ % है तो महिला २२ प्रतिशत है | न्यूज रिपोटर के रूप में ३४ % है | महिला केन्द्रित कहानियो में १२ % है | लैंगिक निति में ९ % है |  कुछ संवेदनशील लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों में 5 % महिला है |

स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिला - the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पुरुषो को महिलाओ से अधिक वरीयता दी जाती है | और महिलाओ को स्वयं का उपचार करने के लिए कहा जाता है | ताकि वह  स्वयं  शिक्षित हो जाए उन्हें डॉ के पास बार न ले जाना पड़े अथवा बार बार पति से इसकी शिकायत न करे | 

जनसख्या के क्षेत्र में महिला  the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक जनसख्या के आधार  महिला एवं पुरुष के बीच 31.4 % गैप को समाप्त किया जा चूका है जबकि ६८.6 का गैप अभी भी विद्यमान है |जिसमे भारत को ११२ रैंक प्राप्त हुआ है जबकि भारत के पडोसी राज्य की स्थितिय अच्छी है जिसमे नेपाल ( 102 ) , श्रीलंका( 102 ) , बंगलादेश (५०) , चीन (१०६ ) रहा |

आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में महिला  - the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में के मजदूरी के आधार पर आका गया जिसमे पाया गया की २०१७ -१८ के दौरान आर्थिक भागीदारी २३. 3 % रहा | २०१८ में इसमें कुछ बढ़ोतरी देखने की मिली यह बढकर 26.९ % हो गई | पुरे विश्व में महिला औसतन ४८.४७ है |

राजनैतिक शक्तिकरण के क्षेत्र में महिला - the Globle gender gap index 2020 के मुताबिक राजनैतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र महिला सुधार हुए क्योकि भारत में महिलाओ ने मुख्य भूमिका 20 वर्षो से लेकर  बीते 50 वर्ष के दौरान की है | किन्तु भारत संसद में महिला की भागीदारी सोचनीय है | भारतीय संसद में महिलाओ की भागीदारी १४.४ %  जो विश्व में  ११२ पायदान है तथा  मंत्रीमंडल में महिलाओ की भागीदारी २३ % है | भारत की बहुत कम महिलाए उद्योगिक जगत में कार्य कर रही है | 

विवाह निषेध अधिनियम २००६ के तहत  भारत में लडकिय की शादी की उम्र १८ व् लडके की 21 वर्ष रखी गई है किन्तु भारत में ८० % ग्रामीण इलाको में अभी भी बाल विवाह किया जाता है जिसका मुख्य कारण जाति , धर्म , परिवार का दबाव है जिनके लिए विधि मायने नही रखती यूनिसेफ की विश्व राज्य के बच्चो की २००९ की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के होने वाले बाल की विवाह का ४० % भारत में होता है जबकि शेष अन्य देशो में होते है | भारत की ४७ %  महिला २०- २४ वर्ष की अवस्था से पूर्व शादी कर लेती है | जिसमे ५६ % महिलाए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाए होती है |


( causes of gender inequality) लैंगिक असमानता के कारण - 


  • पितृसत्तात्मक  सोच   
  • आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में महिला
  • राजनैतिक सशक्तिकरण के प्रति उदासीनता 
  • महिला स्वास्थ्य   के प्रति उदासीनता 
  • जनसांख्यिकी में महिलाओ की कमी 
  • वैश्यावृति ( सेक्स वर्क )
  • देवदासी प्रथा 
  • बाल विवाह
  • पर्दा प्रथा 
  • विवाह की अनिवार्यता 
  • विधवा विवाह निषेध  
  • अश्लित चलचित्र
  • अशिक्षा  
  • घरेलु हिंसा 
  • परम्परागत सोचा 
  • तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओ की कमी  
  • व्यापार के क्षेत्र में महिलाओ में कमी 
  • लैंगिक आधार पर भेदभाव को समाप्त करने वाली लिए नीतियाँ  को कड़ाई के साथ क्रियान्वयन न कर पाना  |
  • महिलाओ के विरोध हो रहे अपराध को रोकने के लिए शक्त कानून का अभाव 
  •  श्रम शक्ति के क्षेत्र में महिला की भारी कमी  
  • जेंडर गैप इंडेक्स में सुधारात्मक  नीतियो पर ध्यान न देना  
  • सम्पति पर महिला का अधिकार न होना 
  • मिडिया के क्षेत्र में महिला की भारी कमी 
  • खेल जगत में महिलाओ की भारी 
  • महिलाओ को समान कार्य के लिए समान वेतन न दिया जाना
  • गरीबी 
  • जाति 
  • अपराध
  • सामाजिक संरचना 
  • भेदभाव  
भारत में  लैंगिक समानता कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?  ( how to achieve gender equality in india ) -

  • पितृसत्ता सोच में परिवर्तन लाया जाए  
  • शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए 
  • तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओ के बढ़ावा दिया जाए 
  • व्यापार के क्षेत्र में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए
  • लैंगिक आधार पर हो रहे भेदभाव को समाप्त करने लिए सरकार के द्वारा नीतियाँ बनाई जाए 
  • महिलाओ के विरोध हो रहे अपराध को रोकने के लिए शक्त कानून तैयार किये जाए 
  •  श्रम शक्ति के क्षेत्र में महिला को बढ़ावा दिया जाए 
  • जेंडर गैप इंडेक्स में सुधार करने के लिए नीतियाँ तैयार किया जाए 
  • सम्पति पर महिला का अधिकार भी सुनिश्चित किया  जाए 
  • मिडिया के क्षेत्र में महिला को बढ़ावा दिया जाए 
  • खेल जगत में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए 
  • महिलाओ को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए 
भारत में लैंगिक समानता को कैसे बढ़ा सकता है  ? ( how to improve gender equality in india)  - 
  • शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए 
  • तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओ के बढ़ावा दिया जाए 
  • व्यापार के क्षेत्र में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए
  • लैंगिक आधार पर हो रहे भेदभाव को समाप्त करने लिए सरकार के द्वारा नीतियाँ बनाई जाए 
  • महिलाओ के विरोध हो रहे अपराध को रोकने के लिए शक्त कानून तैयार किये जाए 
  •  श्रम शक्ति के क्षेत्र में महिला को बढ़ावा दिया जाए 
  • जेंडर गैप इंडेक्स में सुधार करने के लिए नीतियाँ तैयार किया जाए 
  • सम्पति पर महिला का अधिकार भी सुनिश्चित किया  जाए 
  • मिडिया के क्षेत्र में महिला को बढ़ावा दिया जाए 
  • खेल जगत में महिलाओ को बढ़ावा दिया जाए 

क्या भारत में लैंगिक समानता सम्भव है ? ( is gender equality possible in india ) - भारत में लैंगिक समानता सम्भव है | लैंगिक समानता भारत में तभी आ सकती है जबकी लैंगिक समानता के मार्ग में रूकावट न बने पितृसत्ता सोच का अंत किया जाए | भारतीय  समाज में फलफूल रही  पितृसत्ता  सोच ही महिला की अधीनता की मुख्य वजह है | इसलिए जरुरी है की भारत में लैंगिक समानता लाने के लिए  पुरुषवादी सोच को समाप्त किया जाए | जब तक समाज में  नारी को कुल्टा अथवा देवी कहने का प्रचलन समाज में विद्यमान रहेगे तब तक लैंगिक समानता नही आ सकती | नारी को  एक वस्तु से ऊपर उठकर देखने की जरुरत है | आज भारत की महिलाए  इंग्लैंड की महिलाओ से १५० साल पीछे है | इसलिए जरुरी है की  पुरुषवादी सोच में समय का साथ परिवर्तन किया जाए |  

निष्कर्ष :

उपयुक्त विवरणों से यह स्पष्ट हो जाता है भारतीय समाज में अभी समाजिक न्याय कोशो दूर है आज भी महिला की स्थिति समाज सोचनीय है भले ही महिलाओं ने पुरुषो के समान सभी क्षेत्रों में बढ़ चढ़कर  हिस्सा लिया हो चाहे सैनिक शासन से जुड़ा हो , शिक्षा से जुड़ा हो , व्यापार से जुड़ा हो , अर्थ से जुड़ा हो , राजनैतिक क्षेत्रों से जुड़ा हर क्षेत्र में अब महिलाये देखने को मिल जाएगी परन्तु आज भी ,महिलाओ का उनके अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व नही है  महिलाये कुल आबादी  का इस समय लगभग ५० % है फिर भी निति निर्माण से नीति क्रियान्वयन या नीति में महिला प्रतिनिधित्व दम तोड़ रहा है |भारतीय समाज के उच्चे तबके की महिलाये भले ही ज्यादातर क्षेत्रो में कधे से कन्धा मिलकर कम करते हुवे या उनका प्रतिनिधित्व देखने को मिल जायेगा परन्तु भारतीय समाज निचे तबके की महिलाओं की स्थिति आज भी समाज में सोचनी है |जैसा की कौशल्या बैसंती ने  अपनी पुस्तक दोहरे अभिशाप में स्पष्ट किया है ठीक वही स्थिति आज भी समाज में बनी हुई एक भेद भाव महिला महिला होने के नाते सहन करती है तो दूसरा नीची जाति के होने के कारण|
लेखक के निजी विचार है इसे अन्यथा न ले , अपनी बातो को सही सिद्ध करने के लिए कुछ तथ्यों अथवा आकड़ों का जरुर सहारा लिया गया है , जिसके लिए कुछ विद्वानों के विचार , न्यूज़ पेपर , लेख , रिपोर्ट , पुस्तक , पत्रिका , विचार आदि का सहारा लिया गया है |आप अपने विचार इस लेख पर देने के लिए पूर्णतया स्वतंत्र है यदि कोई तथ्यात्मक त्रुटि पायी जाति है तो उसके लिए लेखक क्षमा प्रार्थी होगा उसमे संशोधन किया जायेगा |


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            -   Gender Equality Essay In Hindi
लेखक - शिव कुमार खरवार

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